गंगापुर सिटी।
गंगापुर सिटी के प्राइवेट बस स्टैंड पर सुबह-सुबह उस वक्त चीख-पुकार और हड़कंप मच गया, जब खड़ी बसों में अचानक बेहद भयंकर और विकराल आग लग गई। देखते ही देखते आग की गगनचुंबी लपटों और धुएं के गुबार ने पूरे बस स्टैंड को अपनी चपेट में ले लिया। इस भीषण अग्निकांड में दो निजी बसें पूरी तरह से जलकर खाक (राख) हो गईं, जिससे करीब 20 से 25 लाख रुपये से अधिक के भारी नुकसान का अनुमान है। हालांकि, स्थानीय पत्रकार, जागरूक नागरिकों और दमकलकर्मियों की भारी सूझबूझ से बस स्टैंड पर खड़ी दर्जनों अन्य बसों को जलने से बचा लिया गया, जिससे एक बहुत बड़ी अनहोनी होने से टल गई।
प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय स्टाफ के अनुसार, आग लगने का पता सुबह करीब साढ़े चार बजे चला, जब सवारियों ने एक बस से तेज लपटें उठती देखीं। देखते ही देखते आग ने पास ही खड़ी दूसरी बस को भी अपनी चपेट में ले लिया।
पत्रकार को घर से उठाकर लाए, तब जागी दमकल:
ग्राउंड रिपोर्टर ने बताया कि आग लगने के बाद दमकल विभाग (फायर ब्रिगेड) को लगातार फोन किए गए, लेकिन सुबह का वक्त होने के कारण किसी ने फोन नहीं उठाया। इसके बाद स्थानीय नागरिकों ने तुरंत वरिष्ठ पत्रकार श्रीमान पद्म जी जोशी से संपर्क किया। रिपोर्टर खुद भागकर जोशी जी के घर पहुँचा और उन्हें जगाकर साथ लाया। पत्रकार पद्म जोशी के हस्तक्षेप और तुरंत फोन घुमाने के बाद नगर परिषद का दमकल दस्ता हरकत में आया और मौके पर रवाना हुआ।
जब तक फायर ब्रिगेड मौके पर पहुँचती, तब तक आग तीसरी और चौथी बस को भी चपेट में लेने वाली थी। ऐसे में बस चालकों, स्टाफ और स्थानीय जनता ने अपनी जान जोखिम में डालकर अद्भुत साहस का परिचय दिया:
आग की लपटों के बीच घिरी अन्य बसों को बचाने के लिए जनता ने मैन्युअल धक्का मारना शुरू किया।
एक जलती हुई बस को धक्का देकर किसी तरह मुख्य रोड पर निकाला गया, ताकि अन्य गाड़ियों में ब्लास्ट न हो। इस दौरान गाड़ी के साइड के शीशे टूट गए, लेकिन उसे सुरक्षित दूरी पर पहुँचा दिया गया।
जयपुर जाने वाली बस (नंबर 6115) और सूर्यकांत जी की बस भी आग की तपन से आंशिक रूप से प्रभावित हुईं, लेकिन उन्हें समय रहते हटा लिया गया।
सूचना मिलने के महज 5 से 10 मिनट के भीतर नगर परिषद के चालक राजू भाई और फायर ऑफिसर जुगल जी पूरी तरह पानी से लबालब भरी दो दमकल गाड़ियां लेकर बस स्टैंड के संकरे रास्तों को पार करते हुए घटना स्थल पर पहुंचे।
दमकलकर्मियों (Firemen) और जनता ने मिलकर पाइप फैलाया और सबसे पहले बसों के डीजल टैंक (टंकी) और टायरों पर पानी की बौछारें कीं, क्योंकि टायरों में लगी आग बार-बार सुलग रही थी। करीब 20 मिनट की कड़ी मशक्कत और भारी प्रेशर से पानी डालने के बाद आखिरकार आग पर पूरी तरह काबू पा लिया गया।
स्थानीय बस ऑपरेटरों के अनुसार, जलकर राख हुई दोनों बसें इनके मालिकों की थीं:
अनिल/बिलाल भाई (वजीरपुर वाले) की गाड़ी।
शिव सिंह जी गुर्जर (हिण्डौन वाले) / बॉबी भाई की गाड़ी। ये दोनों बसें पूरी तरह लोहे का ढांचा बनकर रह गई हैं।
खड़ी गाड़ियों में अचानक इतनी भयानक आग कैसे लगी, इसे लेकर अभी पुख्ता कारण सामने नहीं आया है। स्थानीय लोगों और राजीव जी (बस ऑपरेटर) का अनुमान है कि बस स्टैंड पर रात के समय अराजक तत्वों, चोरों या जुआरियों का जमावड़ा रहता है। आशंका है कि किसी के द्वारा सुलगती हुई सिगरेट-बीड़ी फेंकने या किसी शरारत के चलते यह हादसा हुआ।
दमकल अधिकारी जुगल जी और हेड साहब ने मौके पर पुष्टि की कि आग पर अब पूरी तरह काबू पा लिया गया है और स्थिति नियंत्रण में है। यदि दमकल पहुंचने में 10 मिनट की भी और देरी होती, तो पूरा प्राइवेट बस स्टैंड स्वाहा हो जाता।
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