कोटा। कोटा रेल मंडल में संचालित आठ कोच की मेमू (MEMU) ट्रेनें इन दिनों यात्रियों के लिए परेशानी का सबब बनी हुई हैं। कोचों की संख्या कम होने के कारण ट्रेनों में पैर रखने तक की जगह नहीं मिल रही है। आगामी त्योहारों के सीजन को देखते हुए यात्रियों और दैनिक यात्रियों (Daily Up-downers) में भारी रोष है।
डेली अप-डाउनर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष हरचरण सिंह सलूजा ने बताया कि मेमू ट्रेनों में कोच घटाने के बाद हालात बदतर हो गए हैं। सोमवार को कोटा स्टेशन पर तब अफरा-तफरी मच गई जब कोटा-नागदा मेमू में चढ़ने के चक्कर में अत्यधिक भीड़ की वजह से तीन-चार यात्री प्लेटफार्म पर गिरते-गिरते बचे। यात्रियों का कहना है कि वे डिब्बों में जानवरों की तरह ठूंस-ठूंस कर सफर करने को मजबूर हैं, जिससे कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है।
भीड़ और अव्यवस्था की शिकायत जब कोटा मंडल रेल प्रशासन तक पहुँचाई गई, तो रेलवे अधिकारियों ने इसके पीछे 'माघ मेले' का हवाला दिया। प्रशासन के अनुसार:
प्रयागराज में चल रहे माघ मेले के लिए अतिरिक्त ट्रेनों और रैक की आवश्यकता थी, जिसके चलते यहाँ की मेमू ट्रेनों से कुछ कोच हटाकर वहां भेजे गए हैं।
रेलवे ने आश्वासन दिया है कि जैसे ही मेले से ट्रेनें वापस लौटेंगी, मेमू ट्रेनों में कोचों की संख्या को फिर से बढ़ा दिया जाएगा।
एसोसिएशन के अध्यक्ष सलूजा ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही कोच नहीं बढ़ाए गए, तो होली के त्योहार के दौरान स्थिति नियंत्रण से बाहर हो सकती है। कोटा से नागदा, झालावाड़ और बीना रूट पर चलने वाली मेमू ट्रेनों में सबसे ज्यादा भीड़ रहती है, जिनमें मजदूर, छात्र और दैनिक कर्मचारी सफर करते हैं।
मेमू ट्रेनों में कोचों की संख्या कम से कम 12 से 16 की जाए।
त्योहारों को देखते हुए वैकल्पिक स्पेशल ट्रेनें चलाई जाएं।
पीक ऑवर्स (सुबह और शाम) में ट्रेनों के फेरे बढ़ाए जाएं।
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