कोटा: कोटा स्थित रेलवे अस्पताल की कैंटीन एक बार फिर विवादों के घेरे में है। इस बार मामला कैंटीन संचालक द्वारा महिला कर्मचारियों और अस्पताल स्टाफ के साथ अभद्र व्यवहार और असभ्यता का है। डेढ़ दर्जन से अधिक महिला कर्मियों ने इस संबंध में मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (CMS) को लिखित शिकायत सौंपी है, लेकिन कई दिन बीत जाने के बाद भी अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने से कर्मचारियों में भारी रोष है।
अस्पताल स्टाफ और महिला कर्मचारियों ने अपनी शिकायत में बताया कि कैंटीन संचालक का व्यवहार अत्यंत आपत्तिजनक और असभ्य रहता है। आए दिन स्टाफ के साथ बदसलूकी की जाती है। लिखित शिकायत में मांग की गई है कि ऐसे संचालक के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएं ताकि अस्पताल परिसर में कार्यस्थल का वातावरण सुरक्षित और सम्मानजनक बना रहे।
मामले में केवल बदसलूकी ही नहीं, बल्कि कैंटीन के ठेके को लेकर भी गंभीर वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लगे हैं:
बिना टेंडर आवंटन: कर्मचारियों का दावा है कि पिछले 20 वर्षों से एक ही ठेकेदार का कैंटीन पर कब्जा है। आरोप है कि रेलवे बिना किसी पारदर्शी टेंडर प्रक्रिया के हर बार इसी व्यक्ति को ठेका दे देता है।
किराये का नुकसान: वर्तमान में ठेकेदार रेलवे को मात्र दो से ढाई हजार रुपए महीना किराया दे रहा है। पहले यह कैंटीन अस्पताल के एक छोटे कमरे में चलती थी, लेकिन अब रेलवे ने अलग से सुसज्जित कैंटीन तैयार करके दे दी है, फिर भी किराये में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई।
जानकारी के अनुसार, पिछले वर्ष रेलवे ने कैंटीन के लिए टेंडर आमंत्रित किए थे, जिसमें अधिकतम बोली 8 हजार रुपए प्रति माह तक आई थी। इसके बावजूद, बिना किसी ठोस और स्पष्ट कारण के उस टेंडर प्रक्रिया को रद्द कर दिया गया और पुराने ठेकेदार को ही काम जारी रखने दिया गया। इससे रेलवे राजस्व को हर महीने हजारों रुपए का सीधा नुकसान हो रहा है।
स्टाफ की मांग: पीड़ित महिला कर्मचारियों और अन्य स्टाफ सदस्यों ने प्रशासन से मांग की है कि शिकायत पर तुरंत संज्ञान लेते हुए निष्पक्ष जांच कराई जाए और दोषी संचालक का ठेका निरस्त कर नई टेंडर प्रक्रिया शुरू की जाए।
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