रेलवे स्विमिंग पूल में बंदरों का कब्जा: कर्मचारियों के लिए बना बीमारी का घर, स्वच्छता पर गंभीर सवाल

रेलवे स्विमिंग पूल में बंदरों का कब्जा: कर्मचारियों के लिए बना बीमारी का घर, स्वच्छता पर गंभीर सवाल

कोटा, 30 मई 2025: कोटा रेलवे के स्विमिंग पूल में कर्मचारियों की जगह अब बंदरों की 'मौज' हो रही है। भीषण गर्मी में ये बंदर स्विमिंग पूल में नहाने का पूरा लुत्फ उठा रहे हैं, जिससे पूल का पानी दूषित हो रहा है और रेल कर्मचारियों के स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है।

गुरुवार को भी रेलवे स्विमिंग पूल में कई बंदर तैरते और आपस में तैराकी प्रतियोगिता करते नजर आए। कुछ बंदर तो ऊपर से पानी में छलांग लगाने की होड़ करते भी देखे गए। ये बंदर दोपहर में घंटों तक पूल में नहाने का आनंद लेते रहे।

कर्मचारियों के स्वास्थ्य पर खतरा: सबसे चिंताजनक बात यह है कि इन्हीं बंदरों के नहाए हुए पानी में शाम को कर्मचारी भी नहाते नजर आए। बंदरों के नहाने से उनके बाल पानी में झड़ते हैं और लार भी पानी में घुल जाती है, जिससे पानी दूषित हो जाता है। ऐसे पानी में नहाने से कर्मचारियों के बीमार होने की आशंका बनी हुई है।

6 दिन में ही बिगड़ी हालत: उल्लेखनीय है कि इस स्विमिंग पूल को चालू हुए अभी मात्र 6 दिन ही हुए हैं। पिछले शनिवार को ही इसके खुलने की घोषणा की गई थी और रविवार से लोगों ने इसमें आना शुरू कर दिया था। लेकिन समुचित फिल्टर व्यवस्था के अभाव में एक ही दिन में इस पूल का पानी गंदा नजर आने लगा था। मामला सामने आने पर रेलवे ने पानी को साफ भी करवाया था, लेकिन अभी भी पूल की तलहटी में गंदगी साफ नजर आ रही है।

कर्मचारियों की घटती संख्या और 13 साल पुराना मुद्दा: पूल में समुचित सफाई व्यवस्था न होने के कारण इसमें आने वाले कर्मचारियों की संख्या पहले ही अपेक्षाकृत कम हो गई थी। अब बंदरों के नहाने का मामला सामने आने के बाद यह संख्या और भी घट सकती है। गौरतलब है कि पिछले 13 सालों से कर्मचारियों को इस पूल का समुचित लाभ नहीं मिल सका है।

अधिकारियों के पूल से तुलना: इसी रेलवे स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में अधिकारियों के लिए भी एक स्विमिंग पूल बनाया गया था। खास बात यह है कि अधिकारियों का यह स्विमिंग पूल कभी भी बंद नहीं रहा है और उसमें बंदरों आदि के प्रवेश को रोकने के लिए चारों तरफ जालियां लगी हुई हैं। जबकि कर्मचारियों के पूल के लिए ऐसी कोई व्यवस्था करना जरूरी नहीं समझा गया, और यह बंदरों के लिए चारों तरफ से खुला हुआ है। यह स्थिति रेलवे प्रशासन की लापरवाही और कर्मचारियों के स्वास्थ्य के प्रति उदासीनता को दर्शाता है।

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