जयपुर में जिला कलेक्ट्रेट परिसर स्थित भारत निर्माण राजीव गांधी सेवा केंद्र के वीडियो कॉन्फ्रेंस कक्ष में जिला स्तरीय जनसुनवाई और जिला जन अभाव अभियोग निराकरण एवं सतर्कता समिति की बैठक आयोजित हुई। बैठक की अध्यक्षता जिला कलक्टर काना राम ने की, जिसमें भूमि रूपांतरण, नाले की सफाई, विद्युत तार दुरुस्तीकरण, अतिक्रमण हटवाने, और विभिन्न सरकारी योजनाओं के लाभ से संबंधित लगभग 100 प्रकरण प्राप्त हुए। जिला कलक्टर ने सभी अधिकारियों को इन शिकायतों का समयबद्ध, पारदर्शी और संवेदनशीलता के साथ निस्तारण करने के निर्देश दिए। इस दौरान संपर्क पोर्टल पर दर्ज शिकायतों की भी समीक्षा की गई।
मुख्य सचिव सुधांश पंत ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रदेशभर में जनसुनवाई की प्रगति की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को संपर्क 2.0 पोर्टल पर दर्ज प्रकरणों का गुणवत्तापूर्ण और समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने विशेष रूप से छह माह से अधिक समय से लंबित प्रकरणों को सर्वोच्च प्राथमिकता देने पर जोर दिया। इसके अतिरिक्त, उन्होंने अधिकारियों को प्रतिदिन कार्यालय में जनसुनवाई के दौरान आमजन से अन्य मुद्दों पर फीडबैक लेने को कहा, ताकि बेहतर योजना और परिणाम प्राप्त हो सकें।
जिला प्रभारी सचिव डॉ. देबाशीष पृष्टी ने वीसी के माध्यम से समीक्षा करते हुए अत्याधिक वर्षा की चेतावनी के मद्देनजर चंबल नदी के पालीघाट से रामेश्वर घाट तक संभावित जलभराव की स्थिति से निपटने के लिए तटीय गांवों में अलर्ट रहने और आवश्यकता पड़ने पर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित करने की तैयारी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने आपदा प्रबंधन शाखा को एडवाइजरी जारी करने, आवश्यक सामग्री की चेकलिस्ट आमजन तक पहुंचाने, एसडीआरएफ टीमों को सक्रिय रखने और गोताखोरों की सूची अद्यतन रखने को कहा। लटिया नाला सहित संवेदनशील क्षेत्रों में जलभराव से निपटने के लिए पूर्व तैयारी पर भी बल दिया गया। मुख्य चिकित्सा अधिकारी को डायरिया और मौसमी बीमारियों से निपटने हेतु आवश्यक दवाएं और संसाधन तैयार रखने के निर्देश दिए गए।
बैठक में मुख्य कार्यकारी अधिकारी गौरव बुड़ानिया, अतिरिक्त जिला कलक्टर संजय शर्मा, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक रामकुमार कस्वा सहित जिला स्तरीय अधिकारीगण उपस्थित रहे। सभी उपखंड अधिकारीगण वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से बैठक से जुड़े। जिला कलक्टर ने विशेष रूप से अतिक्रमण हटाने और रास्तों को खोलने से जुड़े प्रकरणों को गंभीरता से लेते हुए उपखंड अधिकारियों, तहसीलदारों और नगर परिषद आयुक्तों को पुलिस बल की सहायता से मौके की रिपोर्ट लेकर स्थायी समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने निर्धारित समय में कार्रवाई नहीं होने पर संबंधित अधिकारी की जिम्मेदारी तय करने के लिए भी निर्देशित किया।
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