जयपुर | नीट (NEET) पेपर लीक मामले ने एक बार फिर देश के शिक्षा तंत्र और भर्ती परीक्षाओं की शुचिता पर गहरे सवाल खड़े कर दिए हैं। इस पूरे प्रकरण में सबसे चौंकाने वाला खुलासा कन्सलटेंसी संस्थानों की संदिग्ध भूमिका को लेकर हुआ है। जाली अंकतालिकाओं से लेकर मेडिकल प्रवेश परीक्षा के पेपर लीक तक, कन्सलटेंट्स का नेटवर्क अब एक समानांतर व्यवस्था की तरह काम कर रहा है।
हैरानी की बात यह है कि देश में कन्सलटेंसी संस्थानों के पंजीयन (Registration) और उनकी आर्थिक गतिविधियों को लेकर कोई ठोस सरकारी गाइडलाइन नहीं है। यही कारण है कि भर्ती परीक्षाओं में धांधली और पेपर माफिया के साथ सांठगांठ के मामले लगातार बढ़ रहे हैं।
योग्यता का अभाव: वर्तमान में कन्सलटेंसी चलाने के लिए किसी विशेष शैक्षणिक योग्यता की आवश्यकता नहीं है। अक्सर गैर-विशेषज्ञ लोग भी इंजीनियरिंग और मेडिकल जैसे तकनीकी क्षेत्रों में करियर काउंसलिंग कर रहे हैं, जिसका खामियाजा छात्र भुगत रहे हैं।
लेनदेन में पारदर्शिता की कमी: ये संस्थान छात्रों से लाखों रुपये वसूलते हैं, लेकिन इस भारी-भरकम फीस का कोई सरकारी रिकॉर्ड साझा नहीं किया जाता। बिना पंजीयन के आर्थिक निगरानी करना लगभग असंभव है।
विशेषज्ञों की पहचान गुप्त: अभिभावकों को यह तक पता नहीं होता कि जिस संस्थान पर वे भरोसा कर रहे हैं, वहां परामर्श देने वाले लोग कौन हैं। यदि सरकार विशेषज्ञों के नाम सार्वजनिक करने का नियम बनाए, तो फर्जीवाड़े पर लगाम लग सकती है।
जांच एजेंसियों (SOG) को मिली जानकारी के अनुसार, नीट परीक्षा का कथित "गेस पेपर" परीक्षा से ठीक एक दिन पहले तक बांटा और बेचा गया। आशंका है कि यह पेपर न केवल सोशल मीडिया के जरिए बल्कि ऑफलाइन माध्यमों से भी कई केंद्रों तक पहुंचाया गया।
"सरकार को कन्सलटेंसी संस्थानों के लिए स्पष्ट नियम और मानक तय करने चाहिए। इससे न केवल युवाओं को सही मार्गदर्शन मिलेगा, बल्कि सरकार की आय में भी वृद्धि होगी।"
— हितेश शर्मा, कॅरियर काउंसलर
जांच का दायरा केवल वर्तमान परीक्षा तक सीमित नहीं है। एसओजी (SOG) पिछले साल चयनित हुए उन विद्यार्थियों की भी जांच कर रही है, जहां एक ही परिवार के कई सदस्यों का चयन हुआ है। पुलिस मुख्यालय ने सभी जिला अधीक्षकों को निर्देश दिए हैं कि वे अपने क्षेत्रों में चल रहे कन्सलटेंसी संस्थानों का भौतिक सत्यापन करें।
भर्ती परीक्षाओं की पारदर्शिता बनाए रखने के लिए यह आवश्यक है कि:
सभी कन्सलटेंसी संस्थानों का अनिवार्य पंजीयन हो।
काउंसलर्स की न्यूनतम योग्यता निर्धारित की जाए।
आर्थिक लेनदेन का पूरा ब्यौरा सार्वजनिक किया जाए।
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