भरतपुर: सीएम सिटी भरतपुर में एक गंभीर मामला सामने आया है। यहां के आरबीएम अस्पताल में स्पीच विकलांगता जांच के लिए आवश्यक उपकरणों के अभाव में एक शिक्षक को जयपुर के एसएमएस अस्पताल रेफर किया गया था। लेकिन जयपुर में भी बिना जांच के ही उन्हें अयोग्य घोषित कर दिया गया। इस लापरवाही के कारण पीड़ित शिक्षक को अपनी नौकरी गंवानी पड़ रही है।
क्या है पूरा मामला?
पीड़ित शिक्षक रघुनंदन शर्मा ने भरतपुर जिला कलेक्टर को एक ज्ञापन सौंपा है। इसमें उन्होंने बताया है कि अध्यापक भर्ती 2022 में उनका चयन हुआ था। पदस्थापन से पहले उनकी विकलांगता की जांच आरबीएम अस्पताल में हुई थी, लेकिन वहां आवश्यक उपकरण नहीं होने के कारण उन्हें जयपुर के एसएमएस अस्पताल रेफर कर दिया गया था। जयपुर में बिना किसी जांच के ही उन्हें अयोग्य घोषित कर दिया गया।
शर्मा ने बताया कि एसएमएस अस्पताल में भी स्पीच विकलांगता की जांच नहीं होती है। यह जांच जोधपुर के एम्स में होती है। उन्होंने कलेक्टर से अनुरोध किया है कि उन्हें जोधपुर के एम्स या किसी अन्य अस्पताल में जांच कराने का आदेश दिया जाए।
शिक्षक की व्यथा
शर्मा ने बताया कि वह अनाथ हैं और उन्होंने बहुत मेहनत से यह नौकरी हासिल की थी। प्रशासनिक अधिकारियों की लापरवाही के कारण उन्हें नौकरी से हाथ धोना पड़ रहा है।
कलेक्टर ने क्या किया?
पीड़ित शिक्षक ने कई बार कलेक्टर से शिकायत की है, लेकिन अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। कलेक्टर ने ज्ञापन ले लिया है, लेकिन दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने या शिक्षक को दोबारा जांच कराने के आदेश नहीं दिए हैं।
यह मामला क्यों महत्वपूर्ण है?
क्या किया जाना चाहिए?
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