कोटा | भारतीय रेलवे के सुचारू संचालन में अहम भूमिका निभाने वाले लोको पायलटों और सहायक लोको पायलटों (ALP) को बुनियादी सुविधाओं के लिए तरसना पड़ रहा है। वेस्ट सेंट्रल रेलवे एम्पलाइज यूनियन ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए बताया कि कोटा मंडल के रनिंग स्टाफ को पिछले 6 वर्षों से पानी की बोतल और एक साल से डस्टर तक नहीं दिया गया है।
यूनियन के महामंत्री मुकेश गालव ने मंडल रेल प्रबंधक (DRM) को लिखे पत्र में बताया कि:
नियमों के अनुसार, प्रत्येक लोको पायलट और सहायक लोको पायलट को हर दो वर्ष में 2 लीटर की इन्सुलेटेड ब्रांडेड वाटर बोतल देने का प्रावधान है।
कोटा मुख्यालय पर कार्यरत स्टाफ को पिछले 6 सालों से इन बोतलों का वितरण नहीं किया गया है।
यूनियन ने मांग की है कि जब तक बोतलों की आपूर्ति नहीं होती, तब तक प्रत्येक क्रू चेंजिंग पॉइंट और बड़े स्टेशनों पर लोको के अंदर ठंडे और स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
सिर्फ पानी की बोतल ही नहीं, बल्कि ड्यूटी के दौरान तकनीकी काम में आने वाले अन्य सामान की भी भारी किल्लत है:
डस्टर: लोको पायलटों को पिछले 1 साल से और सहायक लोको पायलटों को 4 महीनों से डस्टर नहीं दिए गए हैं। इससे उन्हें ड्यूटी के दौरान लोको इंजन और लोड चेक करने में खासी परेशानी हो रही है।
साबुन: इंजन की जांच और तकनीकी कार्य के बाद हाथ धोने के लिए दिया जाने वाला साबुन भी बंद कर दिया गया है।
मुकेश गालव ने प्रशासन को अवगत कराया कि इन मुद्दों पर पहले भी कई बार शिकायतें की जा चुकी हैं, लेकिन समाधान नहीं हुआ। यूनियन ने मांग की है कि:
पिछले वर्षों की बकाया बोतलों और डस्टर की तुरंत आपूर्ति की जाए।
डस्टर और साबुन की मासिक आपूर्ति को नियमित किया जाए।
कर्मचारियों की कार्यक्षमता प्रभावित न हो, इसके लिए तुरंत ठोस कदम उठाए जाएं।
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