रेलवे की लापरवाही: आगरा-असारवा ट्रेन में दो की जगह तीन क्रू, स्टाफ की कमी के बीच बढ़ रहा आर्थिक बोझ

रेलवे की लापरवाही: आगरा-असारवा ट्रेन में दो की जगह तीन क्रू, स्टाफ की कमी के बीच बढ़ रहा आर्थिक बोझ

कोटा | कोटा रेल मंडल में रनिंग स्टाफ की भारी कमी के बावजूद आगरा-असारवा ट्रेन (20178-77) के संचालन में प्रबंधन की बड़ी चूक सामने आई है। जहाँ एक तरफ विभाग कर्मचारियों की कमी का रोना रो रहा है, वहीं इस ट्रेन को चलाने के लिए अनावश्यक रूप से तीन क्रू (Guard-Driver) का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे रेलवे को न केवल मैनपावर बल्कि आर्थिक नुकसान भी हो रहा है।

कैसे बदला क्रू बदलने का गणित?

वर्तमान व्यवस्था के अनुसार ट्रेन को तीन चरणों में चलाया जा रहा है:

  1. आगरा से गंगापुर: आगरा के गार्ड-ड्राइवर।

  2. गंगापुर से केशोरायपाटन: गंगापुर के गार्ड-ड्राइवर।

  3. केशोरायपाटन से उदयपुर: कोटा के गार्ड-ड्राइवर।

वापसी में भी यही प्रक्रिया दोहराई जाती है। आश्चर्यजनक बात यह है कि पहले जब यह ट्रेन 'स्पेशल' के रूप में चलती थी, तब इसे आगरा से गंगापुर और गंगापुर से उदयपुर तक मात्र दो ही क्रू संचालित करते थे।

अतिरिक्त खर्च और संसाधनों की बर्बादी

इस नई व्यवस्था के कारण रेलवे को कोटा से केशोरायपाटन तक गार्ड और ड्राइवरों को सड़क मार्ग (किराए के वाहनों) से लाने-ले जाने का अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ रहा है। यदि पुराने ढर्रे पर दो क्रू का उपयोग किया जाए, तो एक क्रू की बचत के साथ-साथ वाहन खर्च भी बचाया जा सकता है।

संरक्षा (Safety) से समझौता: मालगाड़ी के गार्ड चला रहे एक्सप्रेस

रिपोर्ट में सबसे चौंकाने वाला खुलासा सुरक्षा को लेकर हुआ है। रनिंग स्टाफ की कमी के चलते कई बार मेल/एक्सप्रेस ट्रेनों में मालगाड़ी के गार्डों को ड्यूटी पर लगा दिया जाता है।

  • इन गार्डों को पैसेंजर या एक्सप्रेस ट्रेन चलाने का अनुभव नहीं होता।

  • कोटा मंडल की अन्य सवारी गाड़ियों में भी इसी तरह मालगाड़ी के गार्डों से काम लिया जा रहा है, जो यात्रियों की सुरक्षा के लिहाज से बेहद जोखिम भरा है।

12-12 घंटे की ड्यूटी, थकान से बढ़ता खतरा

नियमों के मुताबिक पैसेंजर ट्रेन में मैनेजर (गार्ड) की ड्यूटी 8 घंटे से अधिक नहीं होनी चाहिए। लेकिन हकीकत इसके उलट है:

  • गंगापुर के ट्रेन मैनेजर 60 किमी/घंटा की धीमी रफ्तार वाली ट्रेनों को सीधे रतलाम तक ले जा रहे हैं।

  • इससे उनकी ड्यूटी का समय 12 घंटे तक खिंच रहा है।

  • अत्यधिक थकान के कारण ट्रेन संचालन की संरक्षा प्रभावित होने का डर बना रहता है।

गार्डों का कहना है कि पहले गंगापुर के मैनेजर आगरा मंडल का कार्य देखते थे, लेकिन अब उन्हें रतलाम की ओर कम रफ्तार वाली ट्रेनों में लगाया जा रहा है, जिससे कार्यकुशलता और समय प्रबंधन दोनों बिगड़ रहे हैं।


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