आरक्षण का नया नियम: रेलवे में अब 'जाति या सरनेम' नहीं, 'भर्ती केटेगरी' बनेगी आरक्षण का आधार

आरक्षण का नया नियम: रेलवे में अब 'जाति या सरनेम' नहीं, 'भर्ती केटेगरी' बनेगी आरक्षण का आधार

कोटा: पश्चिम-मध्य रेलवे (West Central Railway) ने ट्रांसफर होकर आए कर्मचारियों के लिए आरक्षण नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव किया है। अब कर्मचारियों को उनकी जाति या सरनेम के आधार पर आरक्षित वर्ग का नहीं माना जाएगा, बल्कि उन्हें आरक्षण का लाभ केवल तभी मिलेगा, जब उनकी मूल भर्ती आरक्षित पद पर हुई हो। पश्चिम-मध्य रेलवे ने सोमवार को इस संबंध में आदेश जारी किए।

अन्य मंडलों से ट्रांसफर होकर पश्चिम-मध्य रेलवे में आए कर्मचारियों को जाति या सरनेम देखकर आरक्षित नहीं माना जाएगा। आरक्षित पद पर भर्ती होने वाले कर्मचारियों को ही आरक्षण का लाभ मिलेगा। पश्चिम-मध्य रेलवे ने सोमवार को इसके आदेश जारी किए हैं।

SC-ST एसोसिएशन की मांग पर स्पष्टीकरण

ऑल इंडिया एससी-एसटी रेलवे एम्प्लाइज एसोसिएशन के कोटा मंडल सचिव अभय सिंह मीणा ने बताया कि संगठन लंबे समय से एससी-एसटी आरक्षण रोस्टर के क्रियान्वयन पर स्पष्टीकरण की मांग कर रहा था।

  • संपर्क अधिकारी राहुल जारेड़ा ने 30 जुलाई को जबलपुर मुख्यालय से मार्गदर्शन मांगा था, लेकिन कोटा कार्मिक विभाग ने तब इन निर्देशों को लागू नहीं किया।

  • इसके बाद, वरिष्ठ मंडल कार्मिक अधिकारी ने 4 सितंबर को फिर से मुख्यालय से मार्गदर्शन मांगा, जिसके परिणामस्वरूप जबलपुर मुख्यालय ने ये नए आदेश जारी किए।

नए आदेशों के मुख्य बिंदु

नए निर्देशों के तहत, आरक्षण रोस्टर के क्रियान्वयन में पारदर्शिता लाई गई है:

  1. अनारक्षित पद सामान्य माना जाएगा: यदि आरक्षित वर्ग का कोई कर्मचारी अनारक्षित पद पर कार्यरत है, तो HRMS रोस्टर असेसमेंट में उस पद को सामान्य (अनारक्षित) माना जाएगा और वह 'एक्सेस' (अधिक) नहीं दिखेगा।

  2. रिक्त आरक्षित पद: रोस्टर में रिक्त आरक्षित पदों को बैकलॉग के रूप में दर्शाया जाएगा।

  3. मेडिकल डीकैटेगराइज़ कर्मचारी: यदि कोई कर्मचारी मेडिकल डिकैटेगराइज़ होने से पहले अपने पुराने कैडर में अनारक्षित बिंदु पर था, तो नए विभाग या कैडर में भी उसे अनारक्षित ही माना जाएगा।

  4. पदोन्नति का समायोजन: 20 जुलाई 2021 से 10 फरवरी 2023 की अवधि में आरक्षित वर्ग के कर्मचारियों को जो पदोन्नति अनारक्षित बिंदु पर दी गई थी, वे उसी बिंदु पर समायोजित मानी जाएंगी।

एसोसिएशन सचिव अभय सिंह मीणा ने स्पष्ट किया कि यह निर्णय सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों और रेलवे बोर्ड द्वारा जारी नीति-निर्देशों के अनुपालन में लिया गया है।


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