टोंक: टोंक जिला जेल में अवैध चौथ वसूली के मामले में एक नया मोड़ आया है। जिला के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) ने इस मामले में दर्ज एफआईआर को खारिज करते हुए पुन: जांच के आदेश दिए हैं।
क्या है मामला?
लगभग चार साल पहले, टोंक जेल में बंदियों से अवैध रूप से चौथ वसूली किए जाने के आरोप लगे थे। इस मामले में हिंदुस्तान शिवसेना के राष्ट्रीय प्रमुख और दिल्ली हाई कोर्ट के एडवोकेट राजेन्द्रसिंह तोमर ने कोर्ट में याचिका दायर की थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि जेल प्रशासन की मिलीभगत से कैदी अन्य कैदियों से जबरन पैसे वसूलते थे।
एफआईआर में गड़बड़ी का आरोप
तोमर ने आरोप लगाया था कि इस मामले में दर्ज एफआईआर में हेरफेर की गई थी। एफआईआर में कुछ शब्दों को जानबूझकर बदल दिया गया था ताकि आरोपियों को बचाया जा सके।
सीजेएम का फैसला
सीजेएम ने तोमर की याचिका पर सुनवाई करते हुए पाया कि एफआईआर में वास्तव में हेरफेर की गई है। उन्होंने इस एफआईआर को खारिज करते हुए पुलिस अधीक्षक टोंक को निर्देश दिए कि इस मामले की जांच एक उच्च पदस्थ अधिकारी से करवाई जाए।
राजेन्द्रसिंह तोमर का बयान
राजेन्द्रसिंह तोमर ने कहा कि यह फैसला सच्चाई की जीत है। उन्होंने कहा कि उन्होंने इस मामले में लंबे समय से लड़ाई लड़ी है और आखिरकार न्याय मिला है। उन्होंने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि इस बार जांच निष्पक्ष होगी और दोषियों को सजा मिलेगी।
आगे क्या होगा?
अब इस मामले की जांच एक पुलिस उप अधीक्षक से ऊपर के पद के अधिकारी द्वारा की जाएगी। यह देखना दिलचस्प होगा कि इस जांच में क्या खुलासे होते हैं और दोषियों के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाती है।
यह मामला क्यों महत्वपूर्ण है?
यह मामला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह दिखाता है कि न्यायपालिका आम आदमी की आवाज सुनती है। इस मामले में, एक आम व्यक्ति ने एक शक्तिशाली प्रणाली के खिलाफ लड़ाई लड़ी और जीत हासिल की। यह मामला यह भी दिखाता है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई जारी रहनी चाहिए।
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