करोड़ों का चढ़ावा, फिर भी अव्यवस्था: सांवलिया सेठ मंदिर में चिलचिलाती धूप में नंगे पैर दौड़ने को मजबूर श्रद्धालु, प्रशासन और ट्रस्ट पर उठे सवाल

चित्तौड़गढ़। प्रसिद्ध कृष्ण धाम श्री सांवलिया सेठ मंदिर अपनी भव्यता और हर महीने आने वाले करोड़ों रुपये के रिकॉर्ड तोड़ चढ़ावे के लिए देश-दुनिया में जाना जाता है। लेकिन इसी 'भक्तों के ठाठ और भगवान के दरबार' से एक ऐसी तस्वीर सामने आ रही है जो बेहद परेशान करने वाली है। भीषण गर्मी और चिलचिलाती धूप के इस दौर में मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं को बुनियादी सुविधाएं तक नसीब नहीं हो रही हैं। हालात यह हैं कि मंदिर के खुले पत्थरों पर पैर न जलें, इसके लिए भक्तों को नंगे पैर दौड़कर रास्ता पार करना पड़ रहा है।

इस अव्यवस्था को लेकर अब आम जनता, स्थानीय निवासियों और सोशल मीडिया पर श्रद्धालुओं का गुस्सा फूट पड़ा है।

करोड़ों के खजाने के बावजूद छाया की व्यवस्था नहीं?

सांवलिया सेठ मंदिर में हर महीने भंडारे (दानपात्र) से करोड़ों रुपये की नकदी, सोना और चांदी निकलता है। इसके बावजूद मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं के लिए धूप से बचने के पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए हैं। खुले प्रांगण में न तो पर्याप्त कारपेट (मैटिंग) बिछाई गई है और न ही पानी का छिड़काव किया जा रहा है। भीषण गर्मी में तपते पत्थरों पर चलना किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं है। बुजुर्गों, महिलाओं और छोटे बच्चों को छांव न मिलने के कारण भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

"सोया हुआ है शासन-प्रशासन और ट्रस्ट"... भक्तों का फूटा गुस्सा

दर्शन करने पहुंचे आक्रोशित श्रद्धालुओं का कहना है कि जब मंदिर ट्रस्ट के पास बजट की कोई कमी नहीं है, तो फिर इतनी बड़ी लापरवाही क्यों बरती जा रही है? एक श्रद्धालु ने अपनी भड़ास निकालते हुए कहा, "लाखों लोग यहाँ आस्था के साथ आते हैं। मंदिर का खजाना भरा हुआ है, लेकिन शासन, प्रशासन और मंदिर ट्रस्ट पूरी तरह सोया हुआ है। क्या भक्तों के लिए अस्थायी टेंट या छाया की व्यवस्था भी नहीं की जा सकती?"

वीआईपी कल्चर पर ध्यान, आम भक्तों की सुध कौन लेगा?

श्रद्धालुओं का आरोप है कि मंदिर प्रशासन का पूरा ध्यान अक्सर वीआईपी व्यवस्थाओं को संभालने में लगा रहता है, जबकि घंटों लाइनों में लगने वाले आम भक्तों को चिलचिलाती धूप में तपने के लिए छोड़ दिया जाता है। मंदिर परिसर के मुख्य मार्गों पर यदि तुरंत शेड या ग्रीन नेट (छायादार जाली) नहीं लगाई गई, तो पैर जलने के कारण कई श्रद्धालु और बच्चे चोटिल हो सकते हैं।

इस गंभीर अव्यवस्था ने मंदिर ट्रस्ट की कार्यप्रणाली और स्थानीय प्रशासन की मुस्तैदी पर बड़े सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। अब देखना यह है कि इस जनआक्रोश के बाद प्रशासन कब जागता है और सांवलिया के दरबार में भक्तों को कब राहत मिलती है।


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