शामगढ़/कोटा, 8 अप्रैल: कोटा-नागदा रेल खंड पर स्थित शामगढ़ स्टेशन के पास शनिवार को एक कंटेनर मालगाड़ी से तेल रिसाव की घटना सामने आई, जिससे एक बड़ी दुर्घटना टल गई। रिसाव के बाद मालगाड़ी को शामगढ़ स्टेशन पर खड़ा कर दिया गया है और कोटा से अधिकारियों के पहुंचने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
सूत्रों के अनुसार, मालगाड़ी रतलाम की ओर से आ रही थी और इसे आगरा फोर्ट यमुना ब्रिज जाना था। सुवासरा स्टेशन के पास एक राइट टर्न लेते समय कर्मचारियों ने मालगाड़ी के पीछे के एक कंटेनर से तरल पदार्थ रिसता हुआ देखा। तत्काल ही स्टेशन मास्टर ने इसकी सूचना कोटा कंट्रोल रूम और शामगढ़ स्टेशन को दी। सूचना मिलते ही शाम करीब 4:30 बजे मालगाड़ी को शामगढ़ में रोका गया।
जांच करने पर पता चला कि एक कंटेनर से भारी मात्रा में तरल पदार्थ का रिसाव हो रहा है। हालांकि, अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि यह कौन सा तरल पदार्थ है, लेकिन कर्मचारियों ने आशंका जताई है कि यह तारपीन का तेल (थिनर) हो सकता है। कर्मचारियों ने बताया कि कंटेनर में तारपीन से भरे कई ड्रम रखे हो सकते हैं, जिनमें से किसी एक के लीक होने के कारण तेल बाहर निकल रहा था।
काटे गए रिसाव वाले कंटेनर:
घटना के बाद मालगाड़ी को यार्ड में ले जाया गया, जहां रिसाव वाले पांच कंटेनरों के पूरे सेट को काटकर अलग कर दिया गया। बाद में मालगाड़ी के दोनों हिस्सों को अलग-अलग खड़ा किया गया। इस दौरान कंटेनर से तेल का रिसाव बंद हो गया, संभवतः लीक हुए ड्रम का तेल समाप्त हो गया था।
बड़ी घटना टली:
कर्मचारियों ने राहत की सांस लेते हुए बताया कि यदि यह वास्तव में तारपीन था, तो एक बड़ी घटना टल गई। तारपीन एक ज्वलनशील पदार्थ है और यदि मालगाड़ी में आग लग जाती, तो पूरी ट्रेन इसकी चपेट में आ सकती थी।
एडीआरएम के पहुंचने की सूचना:
घटना की सूचना मिलने के बाद एडीआरएम ललित कुमार धुरंधर के शामगढ़ पहुंचने की उम्मीद थी, लेकिन देर रात तक वे शामगढ़ नहीं पहुंचे थे।
यह कंटेनर और इसमें भरा हुआ माल एक निजी कंपनी का है, जिसकी सूचना कंटेनर कंपनी को भी दे दी गई है। संभावना है कि कंपनी के अधिकारी रविवार को शामगढ़ पहुंचेंगे।
पहले भी हो चुका है हादसा:
गौरतलब है कि इसी तरह की एक घटना पिछले वर्ष जुलाई में झालावाड़ स्टेशन के पास भी हुई थी, जहां एक कंटेनर मालगाड़ी में आग लग गई थी। उस कंटेनर में भी ज्वलनशील पदार्थ भरा था और आग लगने से वह पूरी तरह नष्ट हो गया था। उस आग की भीषणता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उसकी चपेट में आकर ऊपर के बिजली के तार और नीचे की रेलवे लाइन तक पिघल गई थी। हालांकि, उस घटना में आग लगने के कारणों का अभी तक पता नहीं चल सका है, जिसकी जांच बड़े विशेषज्ञों द्वारा भी की गई थी।
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