राजस्थान में खुले बोरवेल बच्चों के लिए गंभीर खतरा बनते जा रहे हैं। बीते सात सालों में बोरवेल हादसों में 47 बच्चों की जान जा चुकी है। हाल ही के महीनों में दौसा जिले में ऐसी चार घटनाएं सामने आईं, जिनमें तीन लोगों की मौत हो गई। प्रशासन के प्रयासों के बावजूद राज्य में खुले बोरवेल की समस्या गंभीर बनी हुई है।
चूरू के रतनगढ़ में मिले 72 खुले बोरवेल
राजस्थान के चूरू जिले के रतनगढ़ उपखंड में 72 खुले बोरवेल मिले हैं। राज्य के 50 जिलों में औसतन चार से पांच उपखंड हैं, जिससे यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि प्रदेश में हजारों बोरवेल खुले पड़े हो सकते हैं। दौसा और कोटपुतली जैसी घटनाओं के बावजूद न सरकार ने कोई ठोस कदम उठाए हैं और न ही आमजन ने इस गंभीर मुद्दे पर ध्यान दिया है।
दौसा और कोटपुतली में बोरवेल हादसे
हाल ही में दौसा के लालसोट में तीन वर्षीय आर्यन खुले बोरवेल में गिर गया था। उसे बचाने के लिए 52 घंटे का रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया, लेकिन उसे जिंदा नहीं बचाया जा सका। इस हादसे के 10 दिन बाद ही कोटपुतली में तीन वर्षीय मासूम चेतना बोरवेल में गिर गई। उसे बचाने के लिए 116 घंटे से एसडीआरएफ और एनडीआरएफ की टीमें जुटी हैं, लेकिन अभी तक सफलता नहीं मिल पाई है।
सीएम ने दिए सर्वे और कार्रवाई के निर्देश
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बोरवेल हादसों को लेकर चिंता जताई है और दो सप्ताह में प्रदेशभर में खुले बोरवेल का सर्वे पूरा करने और उन्हें ढकने के निर्देश दिए हैं। हालांकि, यह देखना बाकी है कि इस कार्रवाई को कितनी गंभीरता से लागू किया जाएगा।
खुले बोरवेल के खिलाफ सख्त गाइडलाइंस की जरूरत
राजस्थान में बोरवेल हादसे पुलिस, प्रशासन और रेस्क्यू टीमों के लिए बड़ी चुनौती बने हुए हैं। इन घटनाओं से यह स्पष्ट है कि सख्त गाइडलाइंस और उनकी सख्ती से अनुपालना जरूरी है। अगर समय पर कार्रवाई नहीं की गई, तो यह स्थिति और भयावह हो सकती है।
ग्रामीणों की मांग: जल्द ढकें बोरवेल
राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में लोग प्रशासन से जल्द से जल्द खुले बोरवेल ढकने और ठोस कदम उठाने की मांग कर रहे हैं। बच्चों के जीवन की सुरक्षा के लिए अब ठोस कार्रवाई की दरकार है।
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