अनूपगढ़ जिला निरस्त: जनता में आक्रोश, भाजपा नेताओं ने सौंपे इस्तीफे
श्रीगंगानगर । अनूपगढ़ जिले के निरस्त होने से स्थानीय जनता और राजनीतिक हलकों में भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है। इस निर्णय के खिलाफ आमजन और विभिन्न दलों के नेताओं ने नाराजगी जाहिर की है। जहां कांग्रेस कार्यकर्ता इसे जनविरोधी बता रहे हैं, वहीं भाजपा के नेता भी निराश होकर अपने पदों से इस्तीफा दे रहे हैं।
भाजपा नगर मंडल अध्यक्ष मुकेश शर्मा ने अनूपगढ़ के साथ हुए "अन्याय" के विरोध में अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपने पत्र में भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन सिंह राठौड़ को लिखा कि अनूपगढ़ का जिला दर्जा वापस लेने का निर्णय अस्वीकार्य है, और वे इस अन्याय के खिलाफ पद छोड़ रहे हैं।
भाजपा नगर मंडल के महामंत्री विनय चराया ने भी अपने पद से इस्तीफा देते हुए इसे अनूपगढ़ के हितों के खिलाफ बताया। इसके साथ ही एडवोकेट सुशील गोदारा ने सोशल मीडिया पर "मातृभूमि प्रथम" लिखते हुए भाजपा विधि प्रकोष्ठ संयोजक के पद से इस्तीफे की घोषणा की।
भाजपा किसान मोर्चा के जिला उपाध्यक्ष रघुवीर सिंह चीमा ने भी अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने कहा कि वे इस जनविरोधी निर्णय के खिलाफ जनता के साथ आंदोलन करेंगे। चीमा ने स्पष्ट किया कि यदि सरकार अपना फैसला वापस नहीं लेती, तो वे राजनीति से संन्यास ले लेंगे।
जिला बनाओ संघर्ष समिति के आह्वान पर धरना स्थल पर बड़ी संख्या में लोग इकट्ठा हुए। जनता ने मुख्यमंत्री का पुतला जलाकर अपना गुस्सा प्रकट किया।
यूथ कांग्रेस जिलाध्यक्ष साहिल कामरा ने कनॉट प्लेस पर रोष प्रदर्शन की अपील की और इसे सरकार की विफलता करार दिया।
सूत्रों के अनुसार, इस्तीफों का सिलसिला अभी और बढ़ सकता है। भाजपा के कई अन्य पदाधिकारी भी इस मुद्दे पर अपने इस्तीफे देने की तैयारी कर रहे हैं।
स्थानीय जनता और नेताओं का कहना है कि छोटे जिलों से प्रशासनिक कार्यों में सुगमता आती है। वे अनूपगढ़ को फिर से जिला बनाने की मांग कर रहे हैं और इसके लिए सड़क से लेकर सदन तक संघर्ष की तैयारी में हैं।
यह घटनाक्रम राजस्थान की राजनीति में बड़े बदलाव का संकेत दे रहा है, जहां जनता और नेताओं का आक्रोश सरकार के फैसले के खिलाफ खुलकर सामने आ रहा है।
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