कोटा/गंगापुर: गंगापुर के पास छोटी उदई स्टेशन पर बुधवार को हुए दर्दनाक हादसे में दो रेलकर्मियों की मौत हो गई। गोवर्धन सौनी और दिनेश मीणा नामक ये कर्मचारी अप लूप लाइन पर पॉइंट मेंटेनेंस का काम कर रहे थे, तभी पटना-कोटा एक्सप्रेस (13237) की चपेट में आ गए। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि डाउन लाइन से गुजर रही एक मालगाड़ी के हॉर्न की आवाज सुनकर दोनों का ध्यान भटक गया, और वे पीछे से आ रही तेज रफ्तार एक्सप्रेस ट्रेन को नहीं देख पाए।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, पटरियों में घुमाव होने के कारण पटना ट्रेन के चालकों को भी कर्मचारी दूर से दिखाई नहीं दिए। जब तक वे नजर आए, तब तक काफी देर हो चुकी थी। चालकों ने लगातार हॉर्न बजाते हुए 130 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल रही ट्रेन को रोकने की भरसक कोशिश की, लेकिन ट्रेन दोनों कर्मचारियों से टकरा गई।
टक्कर इतनी भीषण थी कि दोनों के शव क्षत-विक्षत हो गए और इंजन में फंस गए। मौके पर पहुंची पुलिस और रेलवे कर्मचारियों ने इंजन से काटकर शवों के अवशेष निकाले। इस कारण पटना ट्रेन घटनास्थल पर लगभग 40 मिनट तक रुकी रही।
घटना की सूचना मिलते ही डीआरएम अनिल कलर तुरंत कोटा कंट्रोल रूम पहुंचे और अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। इसके बाद कोटा से सहायक कार्मिक अधिकारी, वरिष्ठ मंडल सिग्नल एंड टेलीकॉम इंजीनियर नवीन कुमार, वरिष्ठ मंडल संरक्षा अधिकारी गोवर्धन मीणा और वरिष्ठ मंडल सुरक्षा आयुक्त ए नवीन कुमार मौके पर पहुंचे। इन तीनों अधिकारियों की एक कमेटी इस घटना की जांच कर रही है। अधिकारियों ने छोटी उदई स्टेशन के कर्मचारियों और गंगापुर में पटना ट्रेन के चालकों के बयान दर्ज किए हैं।
इस बीच, पश्चिम मध्य रेलवे के प्रमुख मुख्य संरक्षा अधिकारी (पीसीएसओ) प्रवीन खोराना आज कोटा पहुंचेंगे और डीआरएम ऑफिस में अधिकारियों के साथ बैठक करेंगे। माना जा रहा है कि इस गंभीर घटना के मद्देनजर ही उन्होंने तत्काल कोटा आने का निर्णय लिया है। इस घटना की गूंज रेलवे बोर्ड तक पहुंच गई है और कई कर्मचारियों ने रेल मंत्री को ट्वीट कर अपनी नाराजगी व्यक्त की है।
जांच में यह भी सामने आया है कि पॉइंट्स मेंटेनेंस का यह कार्य बिना किसी ब्लॉक के किया जा रहा था। दोनों कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए कोई अन्य कर्मचारी मौजूद नहीं था और उनके पास पर्याप्त सुरक्षा उपकरण भी नहीं थे। कार्य के दौरान संरक्षा नियमों का घोर उल्लंघन पाया गया है। सुपरवाइजर भी घटना के समय मौके पर मौजूद नहीं था, जबकि वह कर्मचारियों के साथ पहुंचा जरूर था, लेकिन बाद में स्टेशन पर वापस चला गया था।
इस हृदयविदारक घटना के बाद से मृतकों के परिजनों का रो-रो कर बुरा हाल है। अस्पताल में भी परिजन गहरे सदमे में दिखे, जिन्हें साथी कर्मचारी और रिश्तेदार ढांढस बंधा रहे थे।
गौरतलब है कि गोवर्धन सैनी और दिनेश मीणा सिग्नल एवं टेलीकॉम विभाग में क्रमशः तकनीशियन और हेल्पर के पद पर कार्यरत थे। घटना के बाद गंगापुर जीआरपी ने शवों को पोस्टमार्टम के लिए सरकारी अस्पताल पहुंचाया और बाद में परिजनों को सौंप दिया। जीआरपी भी मामले की जांच में जुटी है।
इस घटना को लेकर रेल कर्मचारियों में गहरा रोष व्याप्त है। कर्मचारियों का कहना है कि रेलवे में लगातार स्टाफ की कमी हो रही है, जिससे बचे हुए कर्मचारियों पर काम का बोझ बढ़ता जा रहा है। काम के बढ़ते दबाव के कारण आए दिन दुर्घटनाएं हो रही हैं। बुधवार शाम को रेलवे मजदूर संघ ने भी डीआरएम कार्यालय पर विरोध प्रदर्शन किया और इस घटना के लिए प्रशासन को जिम्मेदार ठहराया।
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