पंचायत-निकाय चुनाव: हाईकोर्ट की डेडलाइन आज खत्म, चुनाव टलने से निर्वाचन आयोग की बढ़ेंगी मुश्किलें

पंचायत-निकाय चुनाव: हाईकोर्ट की डेडलाइन आज खत्म, चुनाव टलने से निर्वाचन आयोग की बढ़ेंगी मुश्किलें

 

जयपुर | राजस्थान में स्थानीय निकायों और पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव को लेकर सस्पेंस गहरा गया है। हाईकोर्ट ने पूर्व में आदेश दिया था कि 15 अप्रैल 2026 तक चुनाव प्रक्रिया संपन्न करा ली जाए, लेकिन सरकार द्वारा चुनाव टलवाने के लिए प्रार्थना पत्र पेश किए जाने के बाद अब कानूनी और संवैधानिक संकट खड़ा होता दिख रहा है।

सरकार ने गिनाए चुनाव न कराने के 8 कारण

राज्य सरकार ने हाईकोर्ट में प्रार्थना पत्र पेश कर चुनाव को दिसंबर 2026 तक टालने की गुहार लगाई है। सरकार का तर्क है कि:

  • दिसंबर 2026 तक लगभग सभी पंचायती राज संस्थाओं का कार्यकाल पूरा हो जाएगा, ऐसे में एक साथ चुनाव कराना उचित होगा।

  • सरकार ने 1 अप्रैल 2026 से 10 जनवरी 2027 तक चुनाव नहीं कराने के पीछे 8 प्रमुख कारणों का हवाला दिया है।

निर्वाचन आयोग की मेहनत पर फिरेगा पानी?

यदि चुनाव इस साल नहीं होते हैं, तो राज्य निर्वाचन आयोग की अब तक की पूरी तैयारी बेकार जा सकती है:

  1. मतदाता सूची: आयोग ने फरवरी 2026 में ग्रामीण मतदाता सूचियों को अंतिम रूप दिया था।

  2. नया अपडेशन: चुनाव अगले साल टलने पर आयोग को 1 जनवरी 2027 को 18 वर्ष की आयु पूरी करने वाले नए मतदाताओं के नाम जोड़ने के लिए पूरी कवायद नए सिरे से करनी होगी।

  3. डेडलाइन: शहरी मतदाता सूचियों को अंतिम रूप देने की डेडलाइन भी 22 अप्रैल और 8 मई 2026 है।

"राष्ट्रपति और राज्यपाल करें हस्तक्षेप" – अशोक गहलोत

पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने चुनाव में देरी को लेकर सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा:

  • संवैधानिक संकट: चुनाव समय पर कराना डॉ. भीमराव आंबेडकर के संविधान का हिस्सा है। चुनाव न कराकर सरकार लोकतांत्रिक संस्थाओं को बर्बाद कर रही है।

  • नैतिक अधिकार: जब सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट निर्देश दे चुके हैं, उसके बाद भी चुनाव न कराना सरकार की विफलता है। इस सरकार को सत्ता में रहने का नैतिक अधिकार नहीं है।

  • गहलोत ने मांग की है कि इस मामले में राष्ट्रपति और राज्यपाल को तुरंत हस्तक्षेप करना चाहिए।

अवमानना याचिका की तलवार

हाईकोर्ट की डेडलाइन पूरी होने के साथ ही राज्य निर्वाचन आयुक्त राजेश्वर सिंह और सचिव राजेश वर्मा की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। पूर्व विधायक संयम लोढ़ा की अवमानना याचिका पर कोर्ट पहले ही नोटिस जारी कर चुका है। अब सबकी नजरें हाईकोर्ट के अगले रुख पर टिकी हैं।


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