Rail News: कोटा मंडल मेें रेलवे द्वारा कई मेमू ट्रेनों का संचालन किया जा रहा है। इन मेमू ट्रेनों में अधिकतम 8 ही डिब्बे लगे हैं। डिब्बों की कमी के कारण यात्री इनमें भेड़-बकरियों की तरह सफर को मजबूर हैं। शादी के सावों और त्योहारी सीजन में यह समस्या और ज्यादा विकट हो जाती है। कोच की कमी के चलते अप डाउन करने वाले यात्रियों को भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। सबसे ज्यादा परेशानी बुजुर्गों, दिव्यांग, महिलाआवें और बच्चों को होती है। सीट के लिए आपसी बहस, झगड़ा, धक्कामुक्की तथा मारपीट की नौबत आना आए दिन की बात है। पिछले महिने दरा में भी मेमू ट्रेन में सीट के लिए यात्रियों में गंभीर मारपीट हो गई थी। इसमें एक यात्री घायल भी हो गया था।
डिब्बे बढ़ाने की मांग
यात्रियों द्वारा मेमू ट्रेन में डिब्बों की संख्या बढ़ाने लगातार की जा ही है। लेकिन जबलबुर मुख्यालय का मामला बताकर कोटा मंडल रेल प्रशासन अपनी जिम्मेदारी पूरी कर लेता है।
अधिकारियों ने बताया कि इन दिनो तो मेमू ट्रेनों में कोचों की संख्या बढ़ाना वैसे भी संभव नहीं है। क्योकि सभी स्पेयर डिब्बे और यहां तक की चलती ट्रेनों को भी बंद को कुंभ मेले के लिए भेज दिया गया है। कुंभ मेला समाप्त होने के बाद भी इस दिशा में कुछ हो सकता है।
अप-डाउनर्स ने की मांग
ताजा मांग रेलवे अप-डाऊनर्स प्रोगेसिव वेलफेयर एसोसिएशन ने की है। एसोसिएशन के संभागीय अध्यक्ष पंकज सोनी ने डीआरएम अनिल कालरा को पत्र लिखकर विशेष रुप से कोटा-नागदा (61615-16) मेमू में डिब्बे बढ़ाने कि मांग की है। सोनी ने बताया कि लगातार मांग के बाद भी पिछले तीन साल से इस मेमू में डिब्बों की संख्या नहीं बढ़ाई गई है। इसका खामियाजा कोटा, रामगंजमंडी, भवानीमंडी, शामगढ़, आलोट तथा गरोठ आदि सभी छोटे-बड़े स्टेशनों के हजारों यात्रियों को रोजाना भुगतना पड़ रहा है।
सोनी ने छोटे स्टेशनों पर ट्रेन के ठहराव का समय भी 2 से बढ़ाकर कम से कम पांच मिनट करने की मांग की है। सोनी ने बताया कि ठहराव का कम समय होने के कारण कई बार बुजुर्ग, महिलाएं, दिव्यांग और छोटे बच्चे समय रहते नहीं पाते। इसके चलते दुर्घटनाओं का अंदेशा बना रहता है। पिछले दिनों ऐसे ही एक मामले में एक महिला की ट्रेन से कटकर मौत तक हो चुकी है।