रेलवे में अजीबोगरीब मामला, सहायक लोको पायलट कर रहे 'कॉल बॉय' का काम!

रेलवे में अजीबोगरीब मामला, सहायक लोको पायलट कर रहे 'कॉल बॉय' का काम!

कोटा। कोटा में रेलवे के भीतर एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। जानकारी के अनुसार, रेलवे द्वारा समाप्त किए जा चुके 'कॉल बॉय' के पद पर अब सहायक लोको पायलटों से काम लिया जा रहा है। यह मामला इसलिए भी हैरान करने वाला है क्योंकि रेलवे ने आर्थिक बचत के नाम पर कॉल बॉय के पदों को खत्म किया था, लेकिन अब उसी काम के लिए लगभग ढाई गुना अधिक वेतन वाले सहायक लोको पायलटों को लगाया जा रहा है।

सूत्रों की मानें तो, कभी कॉल बॉय को लगभग 25 हजार रुपये मासिक वेतन मिलता था, जबकि अब इस काम के लिए सहायक लोको पायलट प्रति माह लगभग 70 हजार रुपये ले रहे हैं। वर्तमान में लगभग छह सहायक लोको पायलट कथित तौर पर 'कॉल बॉय' की ड्यूटी कर रहे हैं, जिससे रेलवे को बचत की जगह हर महीने लाखों रुपये का नुकसान हो रहा है।

रनिंग स्टाफ से ऑफिस में काम

यह स्थिति ऐसे समय में सामने आई है जब कोटा रेल मंडल में सहायक लोको पायलटों की पहले से ही कमी है। इस कमी के कारण सहायक लोको पायलटों को समय पर छुट्टी और पर्याप्त आराम भी नहीं मिल पा रहा है। साथी कर्मचारी सहायक लोको पायलटों को 'कॉल बॉय' की ड्यूटी पर लगाने को लाइन पर जाने से बचने के एक तरीके के रूप में देख रहे हैं। इसके अतिरिक्त, पर्यवेक्षकों और कई अन्य रनिंग स्टाफ को भी ऑफिस में ड्यूटी लगाने की जानकारी मिल रही है। इनमें से कई तो ऐसे हैं जो पिछले 6-6 महीनों से लाइन पर नहीं गए हैं। स्टाफ की कमी के चलते कई बार मालगाड़ियां घंटों तक स्टेशन पर खड़ी रहती हैं।

प्रशासनिक कार्रवाई का इंतजार

उल्लेखनीय है कि हाल ही में आयोजित एक बैठक में रनिंग स्टाफ ने डीआरएम अनिल कालरा को अपनी इन समस्याओं से अवगत कराया था। रनिंग स्टाफ को उम्मीद थी कि उच्च अधिकारियों द्वारा इस मामले पर तुरंत ध्यान दिया जाएगा और समाधान निकाला जाएगा। हालांकि, कई दिन बीत जाने के बावजूद इस मामले में अभी तक कोई प्रशासनिक कार्रवाई सामने नहीं आई है।

स्पार्ट ट्रेन में मनमानी ड्यूटी

इसी तरह, दुर्घटना के समय जाने वाली आपातकालीन स्पार्ट ट्रेन में भी मनमानी तरीके से ड्यूटी लगाने का मामला सामने आया है। इस महत्वपूर्ण ट्रेन पर कथित तौर पर कुछ चुनिंदा कर्मचारियों की ही रोजाना ड्यूटी लगाई जाती है, जबकि बड़ी संख्या में अनुभवी चालक उपलब्ध हैं, जिनकी ड्यूटी कभी इस ट्रेन पर नहीं लगाई जाती।

यह पूरा मामला रेलवे प्रशासन के कामकाज पर कई सवाल खड़े करता है और कर्मचारियों के बीच असंतोष का कारण बन रहा है। अब देखना यह है कि इस गंभीर मामले पर उच्च अधिकारी कब और क्या कार्रवाई करते हैं।

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