कोटा। रेलवे माल डिब्बा मरम्मत कारखाना (वर्कशॉप) ने एक काले ऑयल टैंकर के रैक को पेट्रोल परिवहन के लिए तैयार किया है। करीब 50 टैंक के इस रैक को वर्कशॉप ने मात्र 14 दिन में तैयार कर दिया। सोमवार को कोटा स्टेशन से इस रैक को हरी झंडी दिखाई गई। इस अवसर पर डीआरएम अनिल कालरा तथा मुख्य कारखाना प्रबंधक सुधीर सरवरिया सहित अन्य अधिकारी मौजूद थे। इस कार्यक्रम में पश्चिम-मध्य रेलवे की महाप्रबंधक शोभना बंदोपाध्याय भी वर्चुअल रूप से जुड़ीं।
चुनौतीपूर्ण कार्य:
अधिकारियों ने बताया कि काला ऑयल टैंकरों में जम जाता है। इसको साफ करना बड़ा चुनौती पूर्ण काम है। वैगन के अन्दर एवं ऊपर जमे हुए ब्लैक ऑयल को 300 बार के हाई प्रेशर वाटर जेट के उपकरण की मदद से साफ किया गया। निकले हुए ब्लैक ऑयल स्लज को वैक्यूम ट्रक के उपकरण की मदद से खींचकर कारखाने में स्थित ईटीपी प्लांट में डिस्पोज किया गया। इस यंत्रीकृत प्रक्रिया में निकलने वाली खतरनाक गैसों को वैगन के एक मेनहोल पर लगे अल्यूमिनियम ब्लेड वाले ज्वलनरोधी पंखों की मदद से निरंतर बाहर निकाला गया।
पहली बार मशीन से सफाई:
मशीनों की मदद से टैंकर साफ करने का काम पहली बार किया गया है। इससे पहले ऐसे कामों के लिए टैंकरों की सफाई हाथों से की जाती थी, जिसमें मेहनत और पैसा अधिक लगता था। मशीन से साफ करने के कारण रेलवे का श्रम और पैसा दोनों की बचत हुई है। सफाई के बाद यह ब्लैक ऑयल बीटीपीएन मालगाड़ी रैक व्हाइट ऑयल रैक में परिवर्तन हो सकी है।
डीजल-पेट्रोल का होता है परिवहन:
बीटीपीएन वैगन में क्रूड ऑयल, डीजल, पेट्रोल तथा वेज ऑयल आदि का परिवहन किया जाता है। क्रूड वाले को ब्लैक तथा डीजल-पेट्रोल आदि भरने वाले को व्हाइट ऑयल बीटीपीएन वैगन कहा जाता है।
पहले भी तैयार हुए हैं रैक:
उल्लेखनीय है कि यह पहला अवसर नहीं है जब ऑयल टैंकों अन्य कामों के लिए भी तैयार किया गया है। इससे पहले भी वर्कशॉप में विशेष साफ-सफाई कर ऑयल टैंकरों को पेट्रोल-डीजल और पीने के पानी तक के लिए तैयार किए जाते रहे हैं। गुजरात, लातूर और राजस्थान में अन्य जगह के लिए इसी तरह पानी परिवहन के लिए टैंकर तैयार किए गए हैं।
इस परिवर्तन का कारण व्हाइट ऑयल बीटीपीएन वैगन की मांग ज्यादा है।
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