टोंक सर्किट हाउस में मीडिया से रूबरू होते हुए सचिन पायलट ने कहा कि राजस्थान में पंचायत और निकाय चुनाव बेवजह टाले जा रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार हार के डर से लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को रोककर बैठी है।
सचिन पायलट ने चुनाव आयोग और राज्य सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा:
प्रशासकों का राज: वर्तमान में गांवों और शहरों में प्रशासक लगे हुए हैं। जनता के रोजमर्रा के काम अधिकारी उस ढंग से हल नहीं कर सकते जैसे चुने हुए प्रतिनिधि करते हैं।
लोकतंत्र की अवहेलना: भाजपा सरकार के आने के बाद से न तो विश्वविद्यालयों में छात्रसंघ चुनाव हुए, न नगरपालिकाओं के और न ही पंचायतों के। यह संविधान की मूल भावना के खिलाफ है।
समय सीमा का उल्लंघन: न्यायालय के निर्देश के बावजूद 15 अप्रैल की समय सीमा निकल गई, फिर भी चुनाव नहीं कराए गए। पायलट ने चेतावनी दी कि यदि चुनाव नहीं हुए तो वे कोर्ट-कचहरी का रास्ता अपनाएंगे और सरकार पर दबाव बनाएंगे।
मनरेगा (MGNREGA) की स्थिति पर पायलट ने सरकार को घेरते हुए कहा कि केंद्र सरकार ने सिर्फ पाखंड रचने के लिए योजना का नाम बदला था, लेकिन असल उद्देश्य इसे समाप्त करना है।
"कल मैं जिन गांवों में गया, वहां मनरेगा का काम लगभग बंद है। कांग्रेस सरकार के समय लाखों लोग दिहाड़ी कमाकर घर जाते थे, लेकिन आज राजस्थान और पूरे देश में मनरेगा को खत्म करने की साजिश चल रही है।"
पायलट ने सरकार के विकास के दावों को केवल "पोस्टर और मैनेजमेंट" करार दिया। उन्होंने कहा:
पहले बजट में 4 लाख नौकरियों का वादा किया गया था, लेकिन ढाई साल बीतने के बाद भी धरातल पर कुछ नहीं दिख रहा।
सरकार ग्रामीण विकास के लिए पैसा नहीं दे रही है और केवल विज्ञापनों के जरिए अपनी पीठ थपथपा रही है।
आगामी गर्मी को देखते हुए पायलट ने प्रशासन को आगाह किया:
अगले 2-4 हफ्तों में पानी की भारी किल्लत होने वाली है।
सरकार को अभी से वॉटर टैंक, सप्लाई लाइन की मरम्मत और वितरण व्यवस्था दुरुस्त करने के लिए अधिकारियों को सचेत करना चाहिए।
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