राजस्थान में इस साल बड़े चुनावी घमासान की तैयारी, पंचायत और नगर निकाय चुनावों पर सबकी नजर

राजस्थान में इस साल बड़े चुनावी घमासान की तैयारी, पंचायत और नगर निकाय चुनावों पर सबकी नजर

जयपुर : साल 2025 राजस्थान के लिए सियासी दृष्टि से बेहद खास साबित होने वाला है। पंचायत और नगर निकाय चुनावों के जरिए राज्य में इस साल बड़ा राजनीतिक उठापटक देखने को मिल सकता है। वन स्टेट-वन इलेक्शन के तहत प्रदेश में 291 नगर निकायों और 11 हजार से ज्यादा ग्राम पंचायतों के लिए एक साथ चुनाव कराने की तैयारी हो रही है।

पंचायतों का पुनर्गठन और नई गाइडलाइन्स

राज्य सरकार ने पंचायतों के पुनर्गठन की प्रक्रिया शुरू कर दी है। पंचायतों को तीन श्रेणियों में बांटते हुए नई गाइडलाइन्स भी जारी कर दी गई हैं। पंचायतों के सीमांकन और परिसीमन का काम भी चल रहा है। प्रशासनिक स्तर पर तैयारियों के साथ सरकार ने 49 नगर निकायों के निर्वाचित बोर्डों के कार्यकाल समाप्त होने के बाद प्रशासकों की नियुक्ति भी कर दी है।

एक साथ चुनाव कराना बड़ी चुनौती

यूडीएच मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने कहा है कि हर हाल में वन स्टेट-वन इलेक्शन लागू किया जाएगा। हालांकि, यह सरकार के लिए आसान नहीं होगा। राज्य में एक साथ चुनाव कराने के लिए 11 नगर निगम, 33 नगर परिषद, 169 नगर पालिकाओं, और 11 हजार ग्राम पंचायतों में चुनाव कराना होगा। इसके लिए प्रशासनिक स्तर पर व्यापक तैयारियां करनी होंगी।

क्यों अहम हैं ये चुनाव?

पंचायत और शहरी निकाय चुनावों में प्रदेश के 1 लाख से ज्यादा पंच, 11 हजार सरपंच, 7 हजार पंचायत समिति सदस्य, 1 हजार जिला परिषद सदस्य और 7500 पार्षद चुने जाएंगे। इसके अलावा 11 नगर निगमों में मेयर और 33 नगर परिषदों में सभापति के चुनाव भी होंगे।

क्षेत्रीय दलों की चुनौती

इस चुनाव में केवल बीजेपी और कांग्रेस ही नहीं, बल्कि क्षेत्रीय दल भी अपनी ताकत का प्रदर्शन करेंगे। भारत आदिवासी पार्टी (बीएपी) और राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (आरएलपी) जैसे दल भी ग्रामीण और शहरी इलाकों में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश करेंगे। नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल की आरएलपी के लिए यह चुनाव बड़ा सियासी इम्तिहान होगा, खासकर जाटलैंड और ग्रामीण क्षेत्रों में।

राजनीतिक दलों की तैयारियां

राज्य में कांग्रेस और बीजेपी दोनों ही दल अपनी रणनीतियों पर काम कर रहे हैं। वहीं, बीएपी ने प्रदेश भर में विस्तार की योजना बनाई है। दक्षिण राजस्थान में बीएपी की बढ़ती पकड़ इस चुनाव में नई चुनौतियां खड़ी कर सकती है।

प्रशासन की तैयारी

परिसीमन का काम पहले 1 मार्च तक पूरा होना था, लेकिन इसे बढ़ाकर 21 मार्च कर दिया गया है। इसके बाद चुनावों की प्रक्रिया शुरू होगी। सरकार का मानना है कि एक साथ चुनाव कराने से प्रशासनिक खर्च और समय की बचत होगी।

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