जयपुर: राजस्थान में कोचिंग सेंटरों पर नियंत्रण और विद्यार्थियों को सुरक्षा प्रदान करने के लिए राज्य सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। महाधिवक्ता ने हाईकोर्ट को जानकारी दी है कि सरकार इसी सत्र में कोचिंग सेंटर नियामक बिल पेश करेगी। इससे कोचिंग सेंटरों के संचालन में पारदर्शिता आएगी और विद्यार्थियों को बेहतर माहौल मिल सकेगा।
हाईकोर्ट में सुनवाई:
मुख्य न्यायाधीश एमएम श्रीवास्तव और न्यायमूर्ति भुवन गोयल की खंडपीठ ने इस मामले में स्वप्रेरित प्रसंज्ञान पर सुनवाई की। सुनवाई के दौरान महाधिवक्ता राजेंद्र प्रसाद ने अदालत को बताया कि "राजस्थान कोचिंग सेंटर्स कंट्रोल एंड रेगुलेशन बिल, 2025" को मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में कैबिनेट की बैठक में मंजूरी मिल गई है। उन्होंने अदालत को आश्वासन दिया कि इस बिल को इसी विधानसभा सत्र में पेश किया जाएगा। अदालत ने महाधिवक्ता के बयान को रिकॉर्ड पर लेते हुए सुनवाई दो सप्ताह के लिए टाल दी है।
बिल के प्रमुख प्रावधान:
क्यों जरूरी है यह बिल:
पिछले कुछ वर्षों में, राजस्थान के कोचिंग सेंटरों में विद्यार्थियों के आत्महत्या के मामले बढ़े हैं। इन घटनाओं को देखते हुए हाईकोर्ट ने 2016 में स्वप्रेरणा से इस मामले को जनहित याचिका के रूप में सुनवाई शुरू की थी। अदालत ने सरकार से कोचिंग सेंटरों को नियंत्रित करने के लिए कानूनी प्रावधान बनाने की आवश्यकता जताई थी।
सरकार का उद्देश्य:
राज्य सरकार का उद्देश्य इस बिल के माध्यम से कोचिंग सेंटरों में विद्यार्थियों को सुरक्षित और सहायक वातावरण प्रदान करना है। इससे विद्यार्थियों को मानसिक तनाव से मुक्ति मिलेगी और वे अपनी पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित कर सकेंगे।
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