नागौर में निषेधाज्ञा की 'धज्जियां', सांसद हनुमान बेनीवाल ने उठाए सवाल

नागौर में निषेधाज्ञा की 'धज्जियां', सांसद हनुमान बेनीवाल ने उठाए सवाल

नागौर, 22 जुलाई 2025: नागौर से सांसद हनुमान बेनीवाल ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 के तहत लागू निषेधाज्ञा के उल्लंघन और कानून के दोहरे मापदंड पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने यह प्रश्न सीधे केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह और राजस्थान के मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा से पूछा है।

सांसद बेनीवाल ने अपने वक्तव्य में कहा कि दिनांक 15 जुलाई से 8 अगस्त तक नागौर के जिला पुलिस अधीक्षक (एसपी) की सिफारिश पर जिला कलेक्टर नागौर ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 163 के तहत नागौर मुख्यालय के सर्किट हाउस से कलेक्ट्रेट, रेलवे तिराहा से कोर्ट परिसर, कलेक्ट्रेट, एसपी ऑफिस होते हुए नकाश गेट तक के सीमा क्षेत्र में निषेधाज्ञा लागू की है।

बेनीवाल ने सवाल उठाया, "क्या देश की संसद में पारित भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता केवल आम आदमियों के लिए लागू है?" उन्होंने मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा से भी पूछा कि "क्या भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 163 के अंतर्गत प्रदत्त शक्तियों के तहत लगाई जाने वाली निषेधाज्ञा की पालना करना उनके लिए जरूरी नहीं है क्या जो इस निषेधाज्ञा को लगाने की सिफारिश करते हैं?"

उन्होंने आरोप लगाया कि आज नागौर के जिला पुलिस अधीक्षक के विदाई समारोह में इस निषेधाज्ञा की "धज्जियां उड़ती" दिखीं। बेनीवाल ने कहा, "एक तरफ डीजे बजाने वाले लोगों पर चालान करके डीजे बंद होने की बात पुलिस करती है, भाजपा नेताओं के इशारे पर यह एसपी खुद डीजे पकड़ता तो फिर एसपी की विदाई में डीजे पर प्रतिबंध कहां गया?" उन्होंने सरकार से सवाल किया कि क्या उस एसपी की जिम्मेदारी तय की जाएगी।

सांसद ने आशंका जताई कि "आनन-फानन में निषेधाज्ञा तोड़ने के उल्लंघन की श्रेणी से बचने के लिए कोई अनुमति भी दिखाई जाए लेकिन क्या जिला प्रशासन की इस मामले में कोई जवाबदारी नहीं बनती है क्या?"

सबसे गंभीर आरोप लगाते हुए बेनीवाल ने कहा, "आज एसपी के विदाई में घोड़ी लाने वाले से लेकर ठुमके लगाने वालों में से अधिकतर कई थानों की हिस्ट्रीशीटर, तस्कर और अपराधी थे जो यह इंगित करता है कि ऐसे लोग जहां भी जाएंगे वहां वो पहले से ही संदेश दे रहे हैं कि आपका पुलिस कप्तान माफियाओं और अपराधियों को पसंद करता है।"

उन्होंने अंत में कहा, "यहां तो बाड़ ही खेत खाने वाली कहावत चरितार्थ हो गई।"

इस मामले ने नागौर में कानून व्यवस्था और प्रशासन के दोहरे रवैये पर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिस पर सरकार और प्रशासन को जवाब देना होगा।

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