कोटा | रेलवे वर्कशॉप में पदोन्नति नियमों को ताक पर रखकर चहेतों को रेवड़ियाँ बाँटने का गंभीर मामला प्रकाश में आया है। नियमों की अनदेखी का आलम यह रहा कि जिस कर्मचारी का हक बनता था, उसे दरकिनार कर उन लोगों को प्रमोट कर दिया गया जो योग्यता की शर्तों को भी पूरा नहीं करते थे। अब इस मामले में सीबीआई (CBI) की एंट्री और लेबर कोर्ट के सख्त रुख ने अधिकारियों की नींद उड़ा दी है।
वर्कशॉप स्टाफ के अनुसार, करीब 4 साल पहले प्रशांत राठौर की नियुक्ति सीनियर क्लर्क के पद पर 'डायरेक्ट भर्ती' के माध्यम से हुई थी। नियमानुसार, कार्यालय अधीक्षक (OS) के पद पर पदोन्नति के लिए प्रशांत का दावा सबसे मजबूत और पहला था।
अधिकारियों का खेल: अफसरों ने प्रशांत को नजरअंदाज कर उन कर्मचारियों को प्रमोट कर दिया जो नीचे के पदों से प्रमोट होकर सीनियर क्लर्क बने थे।
बिना टाइपिंग टेस्ट प्रमोशन: चौंकाने वाली बात यह है कि इन 'चहेते' कर्मचारियों को बिना अनिवार्य टाइपिंग टेस्ट पास किए ही उच्च पद पर बैठा दिया गया।
जब विभाग ने प्रशांत की आपत्ति को अनसुना कर दिया, तो वे न्याय के लिए जयपुर लेबर कोर्ट पहुँचे। कोर्ट में कई दौर की सुनवाई के बाद यह स्पष्ट हुआ कि सीधी भर्ती वाले प्रशांत को प्राथमिकता मिलना अनिवार्य था। कोर्ट के आदेश के बाद आनन-फानन में प्रशांत को कार्यालय अधीक्षक तो बना दिया गया, लेकिन घोटाला यहीं खत्म नहीं हुआ।
अधूरा सुधार: स्टाफ का आरोप है कि प्रशांत को प्रमोशन दे दिया गया, लेकिन जिन लोगों को गलत तरीके से पदोन्नत किया गया था, उन्हें डिमोट (पदोन्नति रद्द) नहीं किया गया। वे आज भी अवैध रूप से उच्च पदों पर बने हुए हैं।
इस घोटाले के तार पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव के कार्यकाल से भी जुड़ रहे हैं। बताया जा रहा है कि नियम विरुद्ध पदोन्नति पाने वाले कई कर्मचारी उसी समय भर्ती हुए थे, जब 'जमीन के बदले नौकरी' (Land for Job) के आरोप लगे थे।
सीबीआई जांच: इस मामले की जांच सीबीआई पहले से ही कर रही है।
बयान दर्ज: पिछले दिनों सीबीआई की टीम ने कोटा पहुँचकर इन संदिग्ध कर्मचारियों के बयान भी दर्ज किए हैं।
मामला तूल पकड़ते देख वर्तमान प्रशासन ने पल्ला झाड़ना शुरू कर दिया है। मुख्य कारखाना प्रबंधक (CWM) सुधीर सरवरिया का कहना है:
"नियम विरुद्ध पदोन्नति का मामला संज्ञान में आया है। यह प्रकरण मेरे कार्यकाल से पहले का है। फिलहाल पूरे मामले की गंभीरता से जांच करवाई जा रही है।"
| विषय | विवरण |
| स्थान | रेलवे माल डिब्बा मरम्मत कारखाना, कोटा |
| मुख्य पात्र | प्रशांत राठौर (पीड़ित कर्मचारी) |
| विवाद | डायरेक्ट भर्ती बनाम प्रमोटरी कर्मचारी पदोन्नति |
| न्यायिक हस्तक्षेप | जयपुर लेबर कोर्ट का आदेश |
| जांच एजेंसी | सीबीआई (पुराने भर्ती मामलों में) |
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