कोटा। पश्चिम मध्य रेलवे के माल डिब्बा मरम्मत कारखाना (वर्कशॉप) में ड्यूटी के दौरान गंभीर रूप से झुलसे फिटर सगीर खान (57) ने रविवार तड़के जयपुर के अस्पताल में दम तोड़ दिया। 16 दिसंबर को हुई इस दर्दनाक घटना के 13वें दिन सगीर की मौत से रेल कर्मचारियों में शोक की लहर दौड़ गई है। रविवार रात को ही नम आंखों के बीच उन्हें सुपुर्द-ए-खाक कर दिया गया।
वर्कशॉप की बॉडी रिपेयर शॉप में कार्यरत सगीर खान का काम गैस कटर से डिब्बों की कटाई और वेल्डिंग करना था। 16 दिसंबर की शाम करीब 5 बजे, काम खत्म करने के बाद जब वे एलपीजी सिलेंडर को ट्रॉली में रखकर सुरक्षित पिंजरे में रख रहे थे, तभी अचानक लगी आग की चपेट में आ गए। उनका चेहरा, हाथ और शरीर करीब 50 प्रतिशत तक झुलस गया था।
हादसे के बाद सगीर को पहले रेलवे और फिर निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। गुरुवार तक उनकी स्थिति स्थिर थी, लेकिन अचानक तबीयत बिगड़ने पर उन्हें जयपुर के महात्मा गांधी अस्पताल रेफर किया गया। रविवार तड़के करीब 3 बजे सगीर खान ने अंतिम सांस ली। शव का पोस्टमार्टम होने के बाद रविवार रात 8:30 बजे उनका पार्थिव शरीर भीमगंजमंडी स्थित हुसैनी नगर पहुँचा और रात 9:30 बजे कैलाशपुरी कब्रिस्तान में उन्हें दफन किया गया।
घटना के 13 दिन बीत जाने और एक कर्मचारी की जान चले जाने के बावजूद प्रशासन अब तक हादसे के सही कारणों का पता नहीं लगा सका है।
कछुआ चाल जांच: घटना वाले दिन ही आरपीएफ, इलेक्ट्रिक और सेफ्टी अधिकारियों की 4 सदस्यीय कमेटी बनाई गई थी, लेकिन इसकी रिपोर्ट अब तक नहीं आई है।
लीकेज की आशंका: कर्मचारियों के अनुसार, सिलेंडरों से होने वाला गैस लीकेज इस आग का मुख्य कारण हो सकता है। यदि सिलेंडर में धमाका होता तो जान-माल का बड़ा नुकसान हो सकता था।
अचानक मौत का रहस्य: शुरुआती सुधार के बाद अचानक तबीयत बिगड़ने का कारण इंफेक्शन या सांस की तकलीफ माना जा रहा है, जिसकी पुष्टि पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद होगी।
वर्कशॉप के कर्मचारियों ने सगीर की मौत पर गहरा दुख जताया है। कर्मचारियों का कहना है कि सुरक्षा मानकों की अनदेखी और जांच में देरी प्रशासन की लापरवाही को दर्शाती है। सगीर खान अपने पीछे भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं, जो अब न्याय और मुआवजे की आस में है।
16 दिसंबर: ड्यूटी के दौरान गैस की आग से झुलसे।
26 दिसंबर: तबीयत बिगड़ी, जयपुर रेफर किया गया।
29 दिसंबर: तड़के 3 बजे जयपुर में मौत।
29 दिसंबर: रात 9:30 बजे सुपुर्द-ए-खाक।
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