कोटा। रेलवे बोर्ड के मेंबर इन्फ्रास्ट्रक्चर ने मंगलवार को जबलपुर मुख्यालय और कोटा मंडल के अधिकारियों को दो-टूक शब्दों में सख्त निर्देश जारी किए हैं। बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि यदि अमृत भारत योजना के तहत चल रहे स्टेशन पुनर्विकास कार्यों की गति में तुरंत सुधार नहीं होता है, तो संबंधित ठेकेदारों के टेंडर निरस्त किए जाएं।
बोर्ड अधिकारियों ने कोटा स्टेशन के कायाकल्प के लिए 6 महीने की समय सीमा निर्धारित की है। हालांकि, वर्तमान स्थिति को देखते हुए यह लक्ष्य काफी कठिन नजर आ रहा है। आंकड़ों के अनुसार:
कोटा स्टेशन: अब तक मात्र 63 प्रतिशत काम ही पूरा हो सका है।
न्यू कोटा: यहाँ स्थिति बेहतर है और 93 प्रतिशत कार्य संपन्न हो चुका है।
पिछले दिनों डीआरएम ऑफिस में आयोजित बैठक में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने काम की कछुआ चाल पर गहरी नाराजगी व्यक्त की थी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए थे कि दिसंबर तक काम पूरा किया जाए, अन्यथा लापरवाह ठेकेदारों को ब्लैकलिस्ट करने की कार्रवाई हो। इसी दबाव के बीच रेलवे बोर्ड ने जबलपुर मुख्यालय के अधिकारियों और कोटा के चीफ प्रोजेक्ट मैनेजर सौरभ मिश्रा सहित ठेकेदार को दिल्ली तलब किया था।
[Image: Construction work underway at Kota Railway Station]
काम में तेजी लाने के लिए प्रशासन एक बार फिर कोटा स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर-1 पर ब्लॉक लेने की योजना बना रहा है। इसके लिए विभागीय फाइल चल चुकी है और जल्द ही ब्लॉक फाइनल होने की उम्मीद है। उल्लेखनीय है कि इससे पहले दो बार प्लेटफॉर्म नंबर-1 के ब्लॉक की घोषणा हुई थी, लेकिन ऐन वक्त पर उन्हें रद्द करना पड़ा था।
जबलपुर मुख्यालय से चीफ एडमिनिस्ट्रेटिव ऑफिसर और कोटा मंडल की टीम द्वारा बोर्ड के समक्ष अपना पक्ष रखने के बाद अब स्थानीय स्तर पर हलचल तेज हो गई है। माना जा रहा है कि टेंडर रद्द होने और ब्लैकलिस्ट होने के डर से अब निर्माण कार्यों में तेजी देखी जा सकती है।
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