कोटा। नोटबंदी के दौरान कथित तौर पर पुराने नोट बदलने के मामले में फंसे कोटा रेलवे के टिकट बुकिंग सुपरवाइजर चरण लाल कोली को जयपुर कैट (केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण) ने बरी कर दिया है। कैट ने रेलवे बोर्ड की विजिलेंस जांच को गलत ठहराते हुए यह फैसला सुनाया है। इसी के साथ, कैट ने चरण लाल के रिटायरमेंट के अटके हुए 11 लाख 80 हजार रुपये के भुगतान का भी आदेश दिया है।
यह मामला 2016 का है जब नोटबंदी के समय रेलवे बुकिंग कार्यालय से बड़ी मात्रा में पुराने नोट बदले गए थे। मामला सामने आने पर रेलवे बोर्ड विजिलेंस ने बुकिंग सुपरवाइजर चरण लाल के खिलाफ मामला दर्ज किया था। हालांकि, चरण लाल ने नोटबंदी में खुद के शामिल होने से पूरी तरह इनकार किया था। उन्होंने अपने बयान में बताया था कि ये नोट वाणिज्य विभाग और अन्य अधिकारियों ने बदलवाए थे। लेकिन इसके बावजूद, विजिलेंस ने उन अधिकारियों से पूछताछ करना जरूरी नहीं समझा और चरण लाल को दोषी ठहरा दिया। बाद में रेलवे ने चार्ज शीट जारी कर चरण लाल का भोपाल ट्रांसफर कर दिया। कुछ समय बाद चरण लाल रिटायर हो गए, लेकिन रेलवे ने उनका रिटायरमेंट का पैसा रोक लिया था।
इसके बाद, चरण लाल ने इस मामले को जयपुर कैट में चुनौती दी। चरण लाल की मांग पर कैट ने रेलवे को जांच अधिकारी बदलने के आदेश दिए। इसके बाद, कोटा मंडल रेल प्रशासन ने मामले की जांच मुख्य वाणिज्य निरीक्षक राजीव सक्सेना को सौंपी। सक्सेना की जांच में चरण लाल निर्दोष साबित हुए। इस जांच रिपोर्ट के आधार पर, पिछले दिनों कैट ने चरण लाल को दोष मुक्त करते हुए चार्ज शीट वापस लेने और उनके रिटायरमेंट के पैसे जारी करने का आदेश दिया।
पश्चिम-मध्य रेलवे में संभवतः यह पहला मामला है जब विजिलेंस की जांच गलत साबित हुई है। इस कार्रवाई से विजिलेंस पर लगने वाले ये आरोप भी सच साबित हुए हैं कि वे अक्सर बड़े अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई न कर कर्मचारियों को फंसाते हैं। चरण लाल इस पूरे मामले में एक बार भी पीछे नहीं हटे। खुद को निर्दोष साबित करने के लिए वे मामले को कैट में ले जाने के साथ-साथ रेलवे बोर्ड और जबलपुर मुख्यालय को लगातार चिट्ठियां लिखते और ईमेल करते रहे।
गौरतलब है कि नोटबंदी के समय बुकिंग कार्यालय से करीब 3 लाख 65 हजार रुपये के पुराने नोट बदले गए थे। चरण लाल ने अपने बयानों में यह बात कही थी कि अधिकतर नोट वाणिज्य और अन्य अधिकारियों द्वारा बदलवाए गए थे, और इसके अलावा विजिलेंस ने भी नोट बदलवाए थे। उल्लेखनीय है कि नोटबंदी के समय सरकार ने रेलवे बुकिंग कार्यालयों को कुछ दिनों के लिए पुराने नोट स्वीकार करने की अनुमति दी थी।
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