कोटा। राजस्थान में रेलवे के आधुनिकीकरण और विस्तार को इस बार अभूतपूर्व गति मिली है। केंद्र सरकार ने राज्य के लिए 10,228 करोड़ रुपये का रेल बजट आवंटित किया है, जो वर्ष 2009-14 के औसत वार्षिक बजट (682 करोड़) की तुलना में लगभग 15 गुना अधिक है। सोमवार को रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कोटा डीआरएम कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में इन विकास कार्यों का लेखा-जोखा साझा किया।
रेल मंत्री ने बताया कि वर्तमान में राजस्थान में 56,863 करोड़ रुपये की लागत से विभिन्न रेल परियोजनाएं प्रगति पर हैं। इनमें नई लाइनें बिछाने, पटरियों के दोहरीकरण और स्टेशनों के पुनर्विकास जैसे कार्य शामिल हैं।
विस्तार: 2014 के बाद से राज्य में 3,900 किलोमीटर नई रेल पटरियां बिछाई गई हैं, जो कई देशों के कुल रेल नेटवर्क से भी बड़ा आंकड़ा है।
विद्युतीकरण: राज्य के लगभग 99 प्रतिशत रेल मार्गों का बिजलीकरण पूरा हो चुका है।
अमृत भारत स्टेशन योजना: राजस्थान के 85 स्टेशनों को विश्वस्तरीय बनाने के लिए चुना गया है, जिसमें 4,535 करोड़ का निवेश होगा। बूंदी और मांडलगढ़ सहित 11 स्टेशनों का काम पूरा भी हो चुका है।
कोटा रेल मंडल के डीआरएम अनिल कालरा ने स्थानीय पत्रकारों को संबोधित करते हुए कोटा की उपलब्धियों पर प्रकाश डाला।
1. रफ्तार का नया कीर्तिमान: कोटा मंडल में ट्रेनों की रफ्तार 160 किमी प्रति घंटा करने का बुनियादी काम लगभग पूरा हो गया है। हाल ही में वंदे भारत स्लीपर ट्रेन का 180 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से सफल ट्रायल कर कोटा मंडल ने अपनी तकनीकी श्रेष्ठता साबित की है।
2. कवच सिस्टम में अग्रणी: सुरक्षा के लिहाज से कोटा देश का पहला रेल मंडल बन गया है जहां 'कवच' (स्वदेशी ट्रेन सुरक्षा प्रणाली) को प्रभावी ढंग से लागू किया गया है।
3. ट्रैक नवीनीकरण: मंडल में हर साल 150 किलोमीटर पटरियां बदली जा रही हैं। चार आधुनिक मशीनों की मदद से अगले 2-3 वर्षों में 500 किलोमीटर से अधिक पुराने ट्रैक को बदलने का लक्ष्य रखा गया है।
यात्रियों के लिए बड़ी खुशखबरी यह है कि न्यू कोटा स्टेशन और गंगापुर सिटी स्टेशन के पुनर्विकास का 95% कार्य पूरा हो चुका है, जिसके मार्च तक जनता को समर्पित होने की उम्मीद है। मुख्य कोटा स्टेशन पर भी 12 मीटर चौड़ा फुट ओवर ब्रिज (FOB) बनाया जा रहा है, जिसका काम इसी वर्ष पूर्ण होगा।
यातायात व्यवस्था को सुचारू बनाने के लिए एक कंसल्टेंसी फर्म को हायर किया गया है, जो स्टेशन सर्कुलेटिंग एरिया में यात्रियों की सुविधा और ट्रैफिक जाम से मुक्ति के लिए अपनी रिपोर्ट देगी। वर्तमान में कोटा मंडल में लगभग 7,000 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट्स पर काम चल रहा है।
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