कोटा। पश्चिम-मध्य रेलवे एम्पलाई यूनियन को अब अपना कार्यालय खाली करना होगा। जयपुर हाई कोर्ट ने यूनियन द्वारा ऑफिस खाली करने के रेलवे के आदेश पर रोक लगाने की याचिका को खारिज कर दिया है। इस फैसले के बाद, रेलवे ने यूनियन को ऑफिस खाली करने का नोटिस फिर से जारी कर दिया है।
गौरतलब है कि पिछले साल दिसंबर में मान्यता चुनाव हारने के बाद, रेलवे ने सभी सुविधाएं वापस लेने के आदेश जारी किए थे। इसके तहत, यूनियन को कोटा सहित पूरे जोन से ऑफिस और उमराव मल पुरोहित सभागार खाली करने का नोटिस दिया गया था। हालांकि, यूनियन ने रेलवे के इस नोटिस को जयपुर हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। हाई कोर्ट ने तब यथास्थिति बनाए रखने के आदेश जारी करते हुए मामले की सुनवाई शुरू की थी। लगभग चार महीने तक चली सुनवाई के बाद, हाई कोर्ट ने आखिरकार यूनियन की याचिका को खारिज कर दिया। याचिका रद्द होते ही, रेलवे ने यूनियन को स्टेशन रोड स्थित ऑफिस और सभागार खाली करने के आदेश दोबारा जारी कर दिए।
रेलवे मजदूर संघ के सचिव अब्दुल खालिक ने बताया कि संघ द्वारा इस मुद्दे को लगातार उठाया जा रहा था। जबलपुर मुख्यालय में हुई पीएनएम (स्थाई वार्ता तंत्र) बैठक में भी महाप्रबंधक शोभना बंदोपाध्याय के समक्ष यह मुद्दा उठाया गया था। इसके बाद रेलवे ने हाई कोर्ट में मजबूती से अपना पक्ष रखा, जिसके परिणामस्वरूप हाई कोर्ट ने चार महीने के भीतर ही मामले का निस्तारण कर दिया।
इस फैसले के बाद, यूनियन द्वारा रेलवे में संचालित बैंक सोसाइटी और उपभोक्ता भंडार पर भी खतरा मंडरा गया है। कार्यालय खाली करने के आदेश के बाद इन पर भी असर पड़ने की आशंका है।
उल्लेखनीय है कि चुनाव हारने के बाद यूनियन के महामंत्री मुकेश गालव सहित अन्य पदाधिकारियों का डेपुटेशन (प्रतिनियुक्ति) भी रद्द हो गया था। इसके बाद गालव सहित अन्य पदाधिकारी ड्यूटी पर भी जाने लगे थे, लेकिन बाद में गालव ने अपना ट्रांसफर यूनियन को मान्यता मिलने वाले दूसरे जोन में करवा लिया। इसके बाद गालव को फिर से डेपुटेशन मिल गया। गौरतलब है कि गालव का अगले साल मार्च में रिटायरमेंट है।
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