कोटा | कोटा रेलवे स्टेशन का पार्सल कार्यालय इन दिनों यात्रियों के सामान की सुरक्षा को लेकर सवालों के घेरे में है। एक यात्री की बाइक से कीमती पार्ट्स चोरी होने का मामला सामने आया है, जिसमें साढ़े तीन महीने बीत जाने के बाद भी रेलवे प्रशासन चोरों का पता लगाने में नाकाम रहा है। उल्टा, शिकायत करने पर यात्री को अभद्रता का सामना करना पड़ रहा है।
पीड़ित यात्री अजय नंदवाना ने बताया कि उन्होंने 26 सितंबर को कोटा स्टेशन से पुणे के लिए अपनी बाइक बुक कराई थी। चार दिन बाद जब बाइक पुणे पहुँची, तो अजय के होश उड़ गए। बाइक की ब्रेक असेंबली, डिस्क ब्रेक्स और हाइड्रोलिक पंप जैसे महत्वपूर्ण और कीमती उपकरण गायब थे।
अजय का कहना है कि उन्हें पूरा यकीन है कि यह चोरी कोटा स्टेशन पर ही हुई है, क्योंकि पुणे में बाइक मिलते ही उन्होंने कमी पकड़ ली थी और वहां तुरंत इसकी सूचना दी थी।
चोरी की इस घटना के बाद से अजय न्याय के लिए भटक रहे हैं। उन्होंने कोटा और पुणे दोनों स्टेशनों के उच्च अधिकारियों से शिकायत की, लेकिन समाधान के बजाय उन्हें केवल आश्वासन और टालमटोल मिल रहा है।
कोटा अधिकारी का कहना है कि चोरी रास्ते में या पुणे में हुई होगी।
पुणे अधिकारी इसके लिए कोटा पार्सल कार्यालय को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं।
अजय ने बताया कि अपनी शिकायत का स्टेटस जानने के लिए जब वे चार दिन पहले कोटा पार्सल कार्यालय पहुँचे, तो वहां तैनात एक महिला कर्मचारी ने उनके साथ अभद्रता की। मदद करने के बजाय कर्मचारी ने बदतमीजी से बात की, जिससे रेल प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर प्रश्न चिह्न खड़ा होता है।
रेलवे पार्सल के जरिए सामान भेजना अब सुरक्षित नहीं रह गया है। साढ़े तीन महीने का समय बीत जाने के बावजूद सीसीटीवी फुटेज खंगालने या दोषियों पर कार्रवाई करने में रेल प्रशासन की ढिलाई यात्रियों के भरोसे को तोड़ रही है। अजय नंदवाना ने अब उच्च अधिकारियों से इस मामले में हस्तक्षेप कर उचित मुआवजे और दोषियों की गिरफ्तारी की मांग की है।
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