कोटा: रेलवे बोर्ड ने बुधवार को आदेश जारी कर यह स्पष्ट कर दिया है कि मान्यता चुनाव हारने वाले रेल कर्मचारी संगठनों को फिलहाल एक साल तक और कार्यालय की सुविधा मिलती रहेगी। इस निर्णय से रेलवे की पूर्व में निर्धारित नीतियों पर सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि पहले यह तय था कि चुनाव हारने वाले संगठनों को सभी सुविधाएं छोड़नी होंगी।
बोर्ड का आदेश: रेलवे बोर्ड द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि गुप्त मतदान चुनाव (एसबीई) 2024 के बाद मान्यता प्राप्त एआईआरएफ (AIRF) और एनएफआईआर (NFIR) से संबद्ध ट्रेड यूनियनों को क्षेत्रीय और मंडल स्तर पर कार्यालय आवास सहित कुछ सुविधाएं प्रदान की गई हैं। बोर्ड ने यह भी स्पष्ट किया है कि इस नीति की समीक्षा एक वर्ष बाद की जाएगी।
अपनी ही नीतियों से पलटा रेलवे: इस आदेश को जारी कर रेलवे ने अपनी ही पूर्व निर्धारित नीतियों को धता बता दिया है। रेलवे बोर्ड की स्पष्ट नीति थी कि मान्यता चुनाव हारने वाले फेडरेशनों और कर्मचारी संगठनों को कार्यालय खाली करने सहित सभी सुविधाएं छोड़नी होंगी। हालांकि, चुनाव के मात्र 6 महीने बाद ही रेलवे बोर्ड ने अपनी नीतियों में बदलाव करते हुए उन कर्मचारी संगठनों को भी कार्यालय सहित सुविधाएं उपलब्ध कराने के आदेश जारी कर दिए हैं, जो चुनाव में हार गए थे। इसे देखते हुए यह भी आश्चर्य की बात नहीं होगी यदि आने वाले दिनों में हारने वाले संगठनों को और भी कई सुविधाएं उपलब्ध कराने के बोर्ड के निर्णय सामने आएं।
'तू मेरी खुजा मैं तेरी खुजाऊ' वाली स्थिति: कर्मचारी वर्ग इस निर्णय को 'तू मेरी खुजा मैं तेरी खुजाऊ' के रूप में देख रहा है। गौरतलब है कि एआईआरएफ और एनएफआईआर से संबद्ध कई ट्रेड यूनियनें कई जोनों में मान्यता प्राप्त नहीं कर सकी थीं। उदाहरण के तौर पर, पश्चिम-मध्य रेलवे में एआईआरएफ से संबद्ध वेस्ट सेंटर रेलवे एम्पलाई यूनियन अपनी मान्यता खो चुकी थी।
चुनाव हारने के बाद रेलवे ने एम्पलाई यूनियन सहित चुनाव हारने वाले सभी संगठनों से सुविधाएं वापस लेते हुए कार्यालय खाली करने के आदेश दिए थे। ऐसे में दोनों ही प्रमुख फेडरेशन (एआईआरएफ और एनएफआईआर) एक-दूसरे के विरोध में न जाकर रेलवे बोर्ड पर अपने कर्मचारी संगठनों को कार्यालय सहित सभी सुविधाएं वापस दिलाने का दबाव बनाए हुए थे। जब मुख्य फेडरेशनों का विरोध नहीं हुआ, तो रेलवे बोर्ड ने भी एम्पलाई यूनियन सहित चुनाव हारने वाले सभी संगठनों को कार्यालय सहित अन्य सुविधाएं जारी करने के आदेश जारी कर दिए।
अन्य फेडरेशन भी प्रयासरत: बोर्ड के इस निर्णय के बाद अब अन्य फेडरेशन भी चुनाव हारने वाले अपने कर्मचारी संगठनों को सुविधाएं दिलाने के प्रयास में जुट गए हैं।
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