शर्म कर रेलवे, ट्रेन में न चढऩे न उतरने की जगह, प्रशासन को कोसने लगे परेशान यात्री

शर्म कर रेलवे, ट्रेन में न चढऩे न उतरने की जगह, प्रशासन को कोसने लगे परेशान यात्री

Rail News : कोटा। अमृत भारत योजना के तहत चल रहा कोटा स्टेशन का पुनर्विकास काम यात्रियों के लिए जी का जंजाल बनता जा रहा है। जैसे-जैसे काम बढ़ता जा रहा है यात्रियों की परेशानी भी बढ़ती जा रही है। हालात यहां तक पहुंच गए हैं कि यात्रियों को कोच में चढऩे और उतरने के लिए प्रयाप्त जगह तक नहीं मिल रही। इससे गुस्साए यात्री रेलवे को कोसने लगे हैं। इसी तरह गुरुवार को प्लेटफार्म नंबर एक पर पहुंची पुणे-जयपुर के यात्रियों को भी काम के चलते भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। इस ट्रेन के एसी कोच तक यात्रियों को ट्रेन में चढऩे में भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।

ध्यान दें डीआरएम

इससे गुस्साए यात्रियों ने कहा कि रेलवे को शर्म करनी चाहिए। अधिकारियो को कम से कम यात्री सुविधाओं को तो ध्यान रखना चाहिए। पुणे ट्रेन के एसी कोचों में भी यात्रियों को चढऩे और उतरने के लिए प्रर्याप्त जगह तक नही है।
यात्रियों ने कहा कि कम से कम कोटा में तो डीआरएम स्तर पर इस पर ध्यान देने की जरूरत है। काम के दौरान कोच और ट्रेन की स्थिति को बदला जाना चाहिए। इसके अलावा यात्रियों ने कहा कि कम से कम जब प्लेटफार्म पर ट्रेन खड़ी हो तो मुसाफिरों की सुविधा और संरक्षा-सुरक्षा के लिए काम बंद कर देना चाहिए। लेकिन इससे कोटा में प्लेटफार्म पर ट्रेन खड़ी रहने के दौरान भी काम चलता रहता है। यह खतरनाक स्थिति है, इससे यात्रियों को खतरा बना रहता है।

डीआरएम ने किया निरीक्षण

यात्रियों की लगातार शिकायतों के चलते डीआरएम अनिल कालरा ने गुरुवार को कोटा स्टेशन का निरीक्षण किया। इस दौरार कालरा ने काम में तेजी लाने और यात्रियों की सुविधाओं का ध्यान रखने के जरुरी निर्देश दिए।

लगा रखी हैं टीन की चद्दें

उल्लेखनीय है कि काम के चलते ठेकेदार ने संरक्षा की दृष्टि से प्लेटफार्म पर टीन की चद्दे लगा रखा है। इन चद्दरों के चलते प्लेटफार्म पर यात्रियों के आने-जाने के लिए बहुत ही कम जगह बची है। काम के बीच चंद फीट की इस गैलरी से आने-जाने में यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

एक साल और परेशानी

उल्लेखनीय है कि करीब 207 करोड़ की लागत से चल रहा कोटा स्टेशन का काम इसी साल मार्च में समाप्त होना था। लेकिन अभी यहां करीब 52 प्रतिशत काम पूरा पुरा है। अगर यही रफ्तार रही तो यह काम करीब एक साल और चल सकता है। काम के साथ यात्रियों को भी एक साल और परेशान होना पड़ सकता है।

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