कोटा। ग्रीष्मकालीन सीजन में ट्रेनों में होने वाली भारी भीड़ को देखते हुए रेलवे प्रशासन ने मऊ-वलसाड, गोमती नगर-बांद्रा और आजमगढ़-बांद्रा के बीच साप्ताहिक स्पेशल ट्रेनें चलाने का निर्णय लिया है। ये तीनों ट्रेनें दोनों दिशाओं में कुल 15-15 फेरे लगाएंगी, जिससे उत्तर प्रदेश से गुजरात और मुंबई की ओर जाने वाले यात्रियों को सुविधा मिलेगी।
संचालन: 4 अप्रैल से शुरू।
शिड्यूल: मऊ से हर शनिवार (तड़के 3:45 बजे) और वलसाड से हर रविवार (दोपहर 3:10 बजे) रवाना होगी।
कोटा में समय: मऊ से आते समय रात 12:50 बजे और वलसाड से आते समय रात 2:35 बजे।
कोच: कुल 19 डिब्बे (10 सामान्य, 5 शयनयान, 1 AC-III, 1 AC-II)।
प्रमुख ठहराव: गोरखपुर, बस्ती, गोंडा, ऐशबाग, कानपुर सेंट्रल, टूंडला, आगरा, गंगापुर सिटी, कोटा, रामगंज मंडी, भवानी मंडी, रतलाम और सूरत।
संचालन: 6 अप्रैल से शुरू।
शिड्यूल: गोमती नगर से हर सोमवार (दोपहर 2:00 बजे) और बांद्रा से हर मंगलवार (रात 11:00 बजे) रवाना होगी।
कोटा में समय: गोमती नगर से आते समय तड़के 3:55 बजे और बांद्रा से आते समय दोपहर 2:35 बजे।
कोच: कुल 22 डिब्बे (4 सामान्य, 6 शयनयान, 8 AC-III, 2 AC-II)।
प्रमुख ठहराव: ऐशबाग, कानपुर, इटावा, आगरा, बयाना, कोटा, रतलाम, वडोदरा, सूरत और बोरीवली।
संचालन: 4 अप्रैल से शुरू।
शिड्यूल: आजमगढ़ से हर शनिवार (रात 11:15 बजे) और बांद्रा से हर सोमवार (सुबह 10:45 बजे) रवाना होगी।
कोटा में समय: आजमगढ़ से आते समय शाम 6:35 बजे और बांद्रा से आते समय रात 12:10 बजे।
कोच: कुल 20 डिब्बे (2 सामान्य, 8 शयनयान, 8 AC-III इकोनॉमी)।
प्रमुख ठहराव: मऊ, वाराणसी, प्रयागराज, कानपुर, आगरा, गंगापुर सिटी, कोटा, रतलाम और सूरत।
समर स्पेशल ट्रेनों की घोषणा ऐसे समय में हुई है जब नियमित ट्रेनों की स्थिति बेहद चिंताजनक है। अभी गर्मी की छुट्टियाँ पूरी तरह शुरू भी नहीं हुई हैं, लेकिन ट्रेनों में भीड़ का आलम यह है कि स्लीपर कोच भी जनरल कोच जैसे नजर आ रहे हैं।
यात्रियों की परेशानी: आरक्षण होने के बावजूद यात्री भेड़-बकरियों की तरह सफर करने को मजबूर हैं। गैलरी और शौचालय के पास तक खड़े होने की जगह नहीं मिल रही है।
कोटा की स्थिति: शनिवार को कोटा स्टेशन से गुजरी ओखा-गुवाहाटी ट्रेन (15635) में भारी भीड़ देखी गई। यात्रियों ने रोष व्यक्त करते हुए कहा कि महंगा टिकट लेने के बाद भी रेलवे उन्हें बुनियादी सुविधाएं और सम्मानजनक सफर देने में विफल रहा है।
रेलवे विशेषज्ञों का मानना है कि इन 15-15 फेरों वाली स्पेशल ट्रेनों से कुछ हद तक दबाव कम होगा, लेकिन यात्रियों की भारी संख्या को देखते हुए और अधिक फेरों या ट्रेनों की आवश्यकता पड़ सकती है।
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