रेलवे का 'मुन्नाभाई' स्टाइल फर्जीवाड़ा: DRM ऑफिस में ट्रेनिंग, हॉस्पिटल में मेडिकल और फिर 2.5 लाख की ठगी; 2 आरोपी गिरफ्तार

रेलवे का 'मुन्नाभाई' स्टाइल फर्जीवाड़ा: DRM ऑफिस में ट्रेनिंग, हॉस्पिटल में मेडिकल और फिर 2.5 लाख की ठगी; 2 आरोपी गिरफ्तार

कोटा। कोटा रेल मंडल के डीआरएम (DRM) ऑफिस में फर्जी तरीके से परीक्षा और ट्रेनिंग कराकर नौकरी के नाम पर ठगी करने वाले गिरोह का कोटा जीआरपी ने भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने एक साल की मशक्कत के बाद दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि मास्टरमाइंड समेत दो अन्य की तलाश जारी है।

DRM ऑफिस में चला ठगी का 'मायाजाल'

मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा निवासी आरती मोखेडे ने पिछले साल मार्च में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि उसे रेलवे में नौकरी का झांसा देकर कोटा बुलाया गया। ठगों ने उसे विश्वास में लेने के लिए किसी फिल्मी पटकथा की तरह जाल बुना:

  • फर्जी परीक्षा: डीआरएम ऑफिस के एक कमरे में बैठाकर उसकी बाकायदा परीक्षा ली गई।

  • फर्जी मेडिकल: रेलवे अस्पताल ले जाकर उसका ब्लड सैंपल लिया गया और मेडिकल प्रक्रिया पूरी की गई।

  • 7 दिन की ट्रेनिंग: सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि उसे 7 दिनों तक डीआरएम ऑफिस में ट्रेनिंग भी दी गई।

  • ढाई लाख की चपत: इस पूरी प्रक्रिया के दौरान नौकरी पक्की होने के नाम पर उससे 2.5 लाख रुपये ऐंठ लिए गए।

गिरफ्तार आरोपी और फरार मास्टरमाइंड

जीआरपी उपाधीक्षक शकील अहमद के अनुसार, गिरफ्तार किए गए आरोपियों में शामिल हैं:

  1. अनुपम चौधरी: बिहार का निवासी, जो वर्तमान में दिल्ली में रह रहा था।

  2. कौशल शर्मा: कोटा का स्थानीय निवासी।

दोनों आरोपियों को कोर्ट ने जेल भेज दिया है। पुलिस की एक टीम मास्टरमाइंड की तलाश में बिहार रवाना की गई है। माना जा रहा है कि मास्टरमाइंड के पकड़े जाने पर कई बड़े रेल अधिकारियों या कर्मचारियों की संलिप्तता का खुलासा हो सकता है।

सुरक्षा व्यवस्था पर बड़े सवाल

इस मामले ने रेलवे प्रशासन की कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा कर दिया है:

"जिस डीआरएम ऑफिस के गेट पर आरपीएफ का पहरा होता है और जो सीसीटीवी कैमरों से लैस है, वहां कोई बाहरी व्यक्ति 7 दिन तक फर्जी ट्रेनिंग कैसे ले सकता है? कार्मिक विभाग (Personnel Department) की नाक के नीचे यह खेल चलता रहा और किसी को कानो-कान खबर नहीं हुई।"

अधिकारी के फर्जी हस्ताक्षर और डमी कैंडिडेट कनेक्शन

आरती को मिले कॉल लेटर पर जबलपुर मुख्यालय के एक बड़े अधिकारी के हस्ताक्षर मिले हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि इसी अधिकारी का नाम पहले भी 'डमी कैंडिडेट' के जरिए दो महिलाओं को नौकरी दिलाने के मामले में उछल चुका है। हालांकि, पुलिस अभी इन हस्ताक्षरों के असली या नकली होने की जांच कर रही है।

शिनाख्त में नहीं पहचान सकी कर्मचारी

जीआरपी ने आरती को डीआरएम ऑफिस और रेलवे अस्पताल ले जाकर शिनाख्त परेड भी करवाई। आरती ने उन कमरों की पहचान तो कर ली जहाँ उसे बैठाया गया था, लेकिन वह किसी भी रेल कर्मचारी को स्पष्ट रूप से नहीं पहचान सकी।


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