कोटा। रेलवे के दावों और हकीकत के बीच की खाई एक बार फिर उजागर हुई है। सोमवार को कोटा-पटना ट्रेन में सफर कर रहे एक यात्री को अचानक हार्ट अटैक आ गया, लेकिन रेल प्रशासन की भारी लापरवाही के चलते उसे करीब आधे घंटे तक कोई प्राथमिक उपचार नहीं मिल सका। अंततः यात्री को हिंडौन स्टेशन पर उतारकर अस्पताल पहुँचाया गया।
यात्रियों से मिली जानकारी के अनुसार, ट्रेन के स्लीपर कोच में एक यात्री की तबीयत अचानक बिगड़ने लगी। देखते ही देखते यात्री के मुँह से झाग आने लगे, जिसे देखकर कोच में हड़कंप मच गया।
मुसाफिरों ने पेश की मिसाल: यात्री की हालत बिगड़ते देख साथी यात्रियों ने मुस्तैदी दिखाई और उसे सीपिआर (CPR) देना शुरू किया।
ऑनलाइन शिकायत का नहीं हुआ असर: कई यात्रियों ने तत्काल कोटा मंडल रेल प्रशासन को मामले की ऑनलाइन सूचना दी, लेकिन करीब आधे घंटे तक कोई भी रेल कर्मचारी या चिकित्सा सहायता मरीज तक नहीं पहुँची।
जब काफी देर तक कोई मदद नहीं आई, तो यात्री स्वयं टीटीई की तलाश में निकले। चौंकाने वाली बात यह रही कि जहाँ एक यात्री मौत और जिंदगी के बीच जूझ रहा था, वहीं टीटीई वातानुकूलित (AC) कोच में सोता हुआ मिला।
उपचार में विफलता: यात्रियों के जगाने पर टीटीई मौके पर तो पहुँचा, लेकिन वह किसी भी प्रकार की सहायता देने में असमर्थ रहा।
दवाइयों का अभाव: टीटीई के पास आपातकालीन स्थिति के लिए कोई भी जरूरी दवाई उपलब्ध नहीं थी।
उल्लेखनीय है कि कुछ समय पूर्व कोटा मंडल रेल प्रशासन ने बड़े जोर-शोर से दावा किया था कि अब ऑन-ड्यूटी टीटीई आपातकालीन स्थिति में प्राथमिक उपचार देने के सक्षम होंगे। प्रशासन ने कहा था कि:
टीटीई के पास जरूरी दवाइयों की किट होगी।
आपात स्थिति में टीटीई कोटा में मौजूद ऑन-ड्यूटी डॉक्टर से फोन पर बात कर मरीज को उचित दवा देंगे।
लेकिन इस घटना ने इन तमाम दावों की पोल खोल दी है। न तो टीटीई सतर्क मिला और न ही उसके पास जीवन रक्षक दवाएं उपलब्ध थीं। समय रहते मदद न मिलना किसी बड़ी अनहोनी का कारण बन सकता था।
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