36 घंटे चला रेस्क्यू ऑपरेशन
इंद्रा को बचाने के लिए तत्काल बचाव कार्य शुरू कर दिया गया। स्थानीय प्रशासन, एनडीआरएफ और अन्य बचाव दल लगातार 36 घंटे तक रेस्क्यू ऑपरेशन में जुटे रहे। स्थानीय ड्रिलरों की मदद से एक अस्थायी यंत्र तैयार किया गया और इंद्रा को 490 फीट की गहराई से निकाला गया। लेकिन, जब उसे अस्पताल ले जाया गया तो डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
क्यों हुआ हादसा?
बोरवेल का व्यास बहुत कम था और इंद्रा बोरवेल में काफी गहराई तक फंस गई थी, जिसके कारण बचाव कार्य में काफी मुश्किलें आईं।
परिवार का रोना
इंद्रा का परिवार राजस्थान के प्रतापगढ़ जिले के तलाई पाल गांव का रहने वाला है। हर साल परिवार मजदूरी के लिए गुजरात आता था। इस बार भी इंद्रा अपने भाई के साथ गुजरात आई थी। इस घटना से परिवार पूरी तरह से टूट गया है। प्रतापगढ़ जिला कलेक्टर डॉ. अंजली राजोरिया ने घटना की जानकारी परिवार को दे दी है और परिवार के सदस्य गुजरात के लिए रवाना हो चुके हैं।
यह घटना क्यों है महत्वपूर्ण?
यह घटना एक बार फिर बोरवेल हादसों की गंभीरता को उजागर करती है। ऐसे हादसों को रोकने के लिए कड़े कदम उठाने की जरूरत है।
क्या किया जा सकता है?
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