जयपुर: राजस्थान हाईकोर्ट में अदालती आदेशों की पालना नहीं होने के मामलों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। चौंकाने वाली बात यह है कि प्रदेश की शीर्ष अदालत में ऐसे 7,148 अवमानना के मामले लंबित हैं, जिनमें हाईकोर्ट के आदेशों का पालन नहीं किया गया है। यह स्थिति तब है, जब देशभर में अदालती आदेशों की अवहेलना से जुड़े 1.43 लाख से अधिक मामले चल रहे हैं, जिनमें से 1850 से अधिक सुप्रीम कोर्ट में हैं।
आंकड़ों के अनुसार, राजस्थान हाईकोर्ट में साल दर साल अवमानना के मामलों में वृद्धि दर्ज की जा रही है। जानकारों का मानना है कि अवमानना के ज्यादातर मामले सरकार के खिलाफ होते हैं। हालांकि, लंबे समय से इन मामलों में किसी को सजा तो नहीं हुई है, लेकिन कई बार कोर्ट की सख्ती दिखाने पर अदालती आदेशों का पालन जरूर हो जाता है।
इस स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश गोविन्द माथुर ने कहा कि कई बार केस को मेरिट पर तय करने के बजाय केवल अभ्यावेदन देने का आदेश कर दिया जाता है। उन्होंने कहा कि अवमानना की व्यवस्था को अदालती आदेशों का पालन कराने का हथियार बना लिया गया है, जबकि यह सजा के लिए है और आमतौर पर सजा होती नहीं है। उन्होंने कोर्ट के आदेशों की पालना के लिए एक प्रभावी तंत्र बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने अपने 2009 के एक आदेश का हवाला देते हुए कहा कि रिट में दिए गए आदेशों का पालन सिविल प्रक्रिया संहिता के प्रावधानों के तहत होना चाहिए।
वहीं, राजस्थान के पूर्व महाधिवक्ता जी.एस. बापना ने कहा कि सरकार में कई बार कोर्ट के आदेशों को गंभीरता से नहीं लिया जाता है। उन्होंने कहा कि कोर्ट आमतौर पर किसी को जेल नहीं भेजती है, जिसके कारण हर पक्षकार को न्याय के लिए पहली बार और अदालती आदेश की पालना के लिए दूसरी बार कोर्ट जाना पड़ता है। उन्होंने मध्य प्रदेश में इस मामले में सख्ती का उदाहरण देते हुए राजस्थान में विधि विभाग की कमजोरी को इसका कारण बताया। उन्होंने अपने कार्यकाल का जिक्र करते हुए कहा कि वे सीधे मुख्यमंत्री स्तर पर बात करते थे और विधि अधिकारियों की बैठक बुलाकर इस दिशा में पहल की थी।
नेशनल ज्यूडिशियल डेटा ग्रिड के आंकड़ों के अनुसार, देशभर में सबसे अधिक अवमानना के मामले कलकत्ता हाईकोर्ट में (24,886) लंबित हैं, जबकि इलाहाबाद हाईकोर्ट दूसरे स्थान पर (24,376) है। राजस्थान हाईकोर्ट में 7,148 मामलों का लंबित होना भी एक गंभीर स्थिति दर्शाता है।
अदालती आदेशों की लगातार अनदेखी न्यायपालिका की प्रतिष्ठा पर सवाल खड़ा करती है और यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि इन आदेशों का प्रभावी ढंग से पालन हो सके ताकि वादियों को समय पर न्याय मिल सके।
#राजस्थान #हाईकोर्ट #अवमानना #अदालतीआदेश #कानून #न्यायपालिका #जीएसबापना #गोविन्दमाथुर
No comments yet. Be the first to comment!
Please Login to comment.
© G News Portal. All Rights Reserved.