राजस्थान: 12वीं की किताब में कांग्रेस के 'गुणगान' पर भड़के शिक्षामंत्री, बोर्ड अधिकारी APO; सियासी घमासान तेज

राजस्थान: 12वीं की किताब में कांग्रेस के 'गुणगान' पर भड़के शिक्षामंत्री, बोर्ड अधिकारी APO; सियासी घमासान तेज

जयपुर: राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की कक्षा 12वीं की इतिहास की पुस्तक 'आजादी के बाद का स्वर्णिम भारत' में कांग्रेस नेताओं के अत्यधिक 'गुणगान' को लेकर राज्य में सियासी विवाद चरम पर पहुंच गया है। आरोप है कि इस पुस्तक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के योगदान की जानबूझकर अनदेखी की गई है। इस विवाद के बाद, बोर्ड के सीनियर असिस्टेंट डायरेक्टर दिनेश कुमार ओझा को तत्काल प्रभाव से एपीओ (APO) करते हुए शिक्षा निदेशालय, बीकानेर स्थानांतरित कर दिया गया है।

किताबों का वितरण रोका गया, करोड़ों का नुकसान: राज्य पाठ्यपुस्तक मंडल ने नए सत्र-2025 के लिए 'आजादी के बाद का स्वर्णिम भारत' नामक इस पुस्तक की 4.90 लाख प्रतियां छपवाई थीं, जिन्हें प्रदेश के 19,700 स्कूलों में वितरित किया जाना था। इनमें से लगभग 80% किताबें स्कूलों तक पहुंच भी चुकी थीं। लेकिन विवाद सामने आने के बाद, अब इन किताबों को वापस लेने और उनके वितरण पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाने का फैसला लिया गया है। इस कदम से राज्य सरकार को करोड़ों रुपये के आर्थिक नुकसान का अनुमान है।

क्या है विवाद की जड़? दरअसल, विवादित पुस्तक में गांधी-नेहरू परिवार और कांग्रेस के पूर्व प्रधानमंत्रियों के कार्यकाल से संबंधित सामग्री को बेहद विस्तृत रूप से छापा गया है। वहीं, पिछले 11 वर्षों से देश के प्रधानमंत्री के रूप में कार्य कर रहे नरेंद्र मोदी के योगदान को इसमें 'नजरअंदाज' करने का आरोप लगा है। इस असंतुलित प्रस्तुति को लेकर शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने बोर्ड के अधिकारियों पर कड़ी नाराजगी व्यक्त की है।

शिक्षा मंत्री दिलावर ने इस संबंध में एक सवाल के जवाब में दो टूक कहा कि "पैसे बर्बाद हों तो हों, लेकिन बच्चों को गलत जानकारी या जहर नहीं परोसा जाएगा।" उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार ने इस पुस्तक को स्कूलों में पढ़ाने पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है।

अधिकारी का पक्ष और बोर्ड की कार्रवाई: इस कार्रवाई के बाद दिनेश कुमार ओझा, जो बोर्ड में प्रतिनियुक्ति (डेपुटेशन) पर थे, ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह पुस्तक सरकार की अनुमति से ही छापी गई थी और यह पिछले वर्षों के पाठ्यक्रम के अनुरूप ही है। उन्होंने यह भी बताया कि 2026-27 में पाठ्यक्रम संशोधन होना है। ओझा ने कहा कि उन्हें हटाने का कारण स्पष्ट नहीं किया गया है और उन्होंने इस कार्रवाई पर निराशा व्यक्त की, लेकिन इससे अधिक कुछ भी कहने से इनकार कर दिया।

वहीं, बोर्ड सचिव कैलाश चंद्र शर्मा ने बताया कि ओझा का तबादला शिक्षा निदेशालय, बीकानेर कर दिया गया है। इससे पहले, लगभग डेढ़ महीने पूर्व एकेडमिक निदेशक राकेश स्वामी को भी एपीओ कर हटाया गया था।

शिक्षामंत्री का सख्त रुख और कांग्रेस का पलटवार: शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने पुस्तक में कांग्रेस नेताओं के 'गुणगान' पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि बच्चों को किसी भी कीमत पर गलत जानकारी नहीं दी जाएगी। उन्होंने किताबों के वितरण पर रोक लगाने का निर्णय लिया, भले ही इससे सरकार को आर्थिक नुकसान हो। दिलावर ने स्पष्ट किया कि सरकार ऐसी किसी भी सामग्री को स्वीकार नहीं करेगी जो एकतरफा दृष्टिकोण प्रस्तुत करती हो या इतिहास के साथ छेड़छाड़ करे।

इस मामले पर कांग्रेस ने भी पलटवार किया है। कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष और पूर्व शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा ने सरकार के इस कदम को 'शिक्षा पर वैचारिक प्रहार' करार दिया। उन्होंने कहा कि "नेहरू, इंदिरा, राजीव और मनमोहन सिंह जैसे नेताओं के योगदान को इतिहास से मिटाया नहीं जा सकता। ये किताबें उनके कार्यकाल के अमिट योगदान को दर्शाती हैं। क्या सरकार बच्चों से सच्चाई और इतिहास छिपाना चाहती है?" डोटासरा ने राज्य सरकार पर इतिहास को तोड़-मरोड़कर प्रस्तुत करने का आरोप लगाया है।

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