राजस्थान लैब असिस्टेंट भर्ती घोटाला: OMR शीट में हेराफेरी कर 4 नंबर को बनाया 191, दौसा से आरोपी गिरफ्तार

राजस्थान लैब असिस्टेंट भर्ती घोटाला: OMR शीट में हेराफेरी कर 4 नंबर को बनाया 191, दौसा से आरोपी गिरफ्तार

राजस्थान लैब असिस्टेंट भर्ती घोटाला: OMR शीट में हेराफेरी कर 4 नंबर को बनाया 191; दौसा से आरोपी पंकज सैनी गिरफ्तार, स्कैनिंग एजेंसी के खेल का पर्दाफाश

जयपुर।

राजस्थान में सरकारी भर्तियों में फर्जीवाड़े और ओएमआर (OMR) शीट में हेराफेरी करने वाले माफियाओं के खिलाफ स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) ने एक और बड़ी और सर्जिकल कार्रवाई को अंजाम दिया है। एसओजी की टीम ने लैब असिस्टेंट (प्रयोगशाला सहायक) भर्ती परीक्षा में फर्जी तरीके से ओएमआर शीट बदलकर नौकरी हासिल करने वाले एक और शातिर आरोपी को दबोच लिया है।

एसओजी के एडीजी (ADG) विशाल बंसल के अनुसार, रविवार रात को दौसा जिले के बांदीकुई निवासी 30 वर्षीय पंकज कुमार सैनी को गिरफ्तार किया गया है। आरोपी ने महज 4 अंक आने के बावजूद स्कैनिंग के दौरान रिकॉर्ड में हेराफेरी करवाकर सरकारी नौकरी हथिया ली थी। इस पूरे भर्ती घोटाले को लेकर साल 2025 में मुकदमा दर्ज किया गया था, जिसकी परतें अब एक-एक कर खुल रही हैं।

📊 डिजिटल सेंधमारी: 4 नंबर को बना दिया 191, दोबारा स्कैनिंग में खुला 'ब्लैक बॉक्स'

एसओजी की तकनीकी और विधिक जांच में जो खुलासा हुआ है, उसने परीक्षा कराने वाली एजेंसियों और सुरक्षा दावों की पोल खोल कर रख दी है:

  • असली प्राप्तांक मात्र 4: आरोपी पंकज कुमार सैनी ने जब परीक्षा दी, तो उसकी मूल ओएमआर शीट के मूल्यांकन में उसे सिर्फ 4 नंबर मिले थे।

  • डिजिटल हेरफेर से 191 अंक: परीक्षा परिणाम जारी होने और स्कैनिंग के दौरान रिकॉर्ड से ऐसी तगड़ी छेड़छाड़ की गई कि 4 नंबर सीधे 191 अंकों में तब्दील हो गए। इसी फर्जी और बढ़े हुए स्कोर के बूते आरोपी ने मेरिट लिस्ट में जगह बनाई और लैब असिस्टेंट पद पर तैनात हो गया।

  • कर्मचारी चयन बोर्ड की री-स्कैनिंग: विभाग को भनक लगने के बाद जब राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड ने संदिग्ध ओएमआर शीट्स की दोबारा से उच्च स्तरीय री-स्कैनिंग (Re-scanning) करवाई, तो पूरा खेल बेनकाब हो गया। दोबारा जांच में प्रमाणित हो गया कि डेटाबेस के साथ भारी छेड़छाड़ की गई थी।

🏢 'राभव लिमिटेड' एजेंसी के कर्मचारियों ने बेची ईमानदारी; 27 अभ्यर्थियों का फर्जी चयन

जांच में सबसे बड़ा मोड तब आया जब ओएमआर शीट की स्कैनिंग करने वाली अधिकृत कंपनी की भूमिका सामने आई:

  • स्कैनिंग का जिम्मा: परीक्षा की ओएमआर शीट्स को स्कैन करने का ठेका 'राभव लिमिटेड' नाम की एजेंसी के पास था।

  • गैंग का कारनामा: एजेंसी के कर्मचारी विनोद कुमार गौड़ और शादान खान ने मोटी रकम लेकर कुछ चुनिंदा अभ्यर्थियों के साथ एक गुप्त सिंडिकेट बनाया।

  • 27 अभ्यर्थी राडार पर: जांच के अनुसार, इस डिजिटल हेरफेर के जरिए कुल 27 अभ्यर्थियों को गलत और अवैध तरीके से चयनित विद्यार्थियों की अंतिम (फाइनल) सूची में शामिल करवाया गया था। इस मामले में कंपनी के उच्च अधिकारियों की मिलीभगत की भी गहराई से तफ्तीश की जा रही है।

⛓️ सलाखों के पीछे पहुंचे ये बड़े मोहरे (अब तक की गिरफ्तारियां)

एसओजी इस पूरे नेक्सस को ध्वस्त करने के लिए ताबड़तोड़ गिरफ्तारियां कर रही है। पंकज सैनी से पहले इस रैकेट से जुड़े कई रसूखदार और अभ्यर्थी जेल भेजे जा चुके हैं:

श्रेणी गिरफ्तार आरोपियों के नाम विभाग/भूमिका
एजेंसी/कंपनी प्रबंधन रामप्रवेश सिंह कार्यकारी निदेशक (Executive Director), राभव लिमिटेड
स्कैनिंग ऑपरेटर विनोद कुमार गौड़, शादान खान ओएमआर शीट डेटा में हेरफेर करने वाले मुख्य कर्मचारी
अवैध लाभार्थी (अभ्यर्थी) महेंद्र कुमार मीणा, देवेंद्र सिंह गुर्जर, विजय सिंह मीणा, पिंटू कुमार मीणा, संजय कुमार सैनी और पंकज कुमार सैनी (नवीनतम गिरफ्तारी) 4 से लेकर मामूली नंबरों को 190+ करवाकर नौकरी पाने वाले आरोपी

🔍 विश्लेषणात्मक निष्कर्ष: आगे और बड़े खुलासे होने की उम्मीद

बांदीकुई के पंकज सैनी की गिरफ्तारी के बाद एसओजी के अधिकारी अब उसे रिमांड पर लेकर पूछताछ कर रहे हैं। जांच एजेंसी का मुख्य फोकस अब उन कड़ियों को जोड़ना है जिसके तहत करोड़ों रुपये के लेनदेन के रास्ते इस फर्जीवाड़े को अंजाम दिया गया। सूत्रों के मुताबिक, आने वाले दिनों में कर्मचारी चयन बोर्ड के कुछ अंदरूनी संपर्कों और राभव लिमिटेड के अन्य बड़े अधिकारियों पर भी कानून का शिकंजा कस सकता है।

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