राजस्थान: मदरसा पैराटीचर्स करेंगे अल्पसंख्यक विभाग के लोन की वसूली, 17 करोड़ की बकाया राशि बनी सिरदर्द

राजस्थान: मदरसा पैराटीचर्स करेंगे अल्पसंख्यक विभाग के लोन की वसूली, 17 करोड़ की बकाया राशि बनी सिरदर्द

जयपुर: राजस्थान के अल्पसंख्यक मामलात विभाग ने एक नई पहल शुरू की है। विभाग अब मदरसा बोर्ड के पैराटीचर्स की मदद से अपने बकाया लोन की वसूली करेगा। अल्पसंख्यक वित्त एवं विकास सहकारी निगम लिमिटेड (आरएमएफडीसीसी) द्वारा दिए गए करीब 17 करोड़ रुपये की बकाया राशि की वसूली के लिए मदरसा पैराटीचर्स को जिम्मेदारी सौंपी गई है।

विभाग की योजना है कि मदरसा बोर्ड के पैराटीचर्स घर-घर जाकर लोन लेने वाले लाभार्थियों को नोटिस देंगे और उनसे बकाया राशि चुकाने का आग्रह करेंगे। हालांकि, इस कार्य के लिए पैराटीचर्स को किसी प्रकार का अतिरिक्त मानदेय नहीं दिया जाएगा।

दरअसल, अल्पसंख्यक मामलात विभाग विभिन्न योजनाओं के तहत जरूरतमंद अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों को व्यवसाय और शिक्षा के लिए लोन प्रदान करता है। लेकिन, इनमें से कई लोग समय पर अपनी किश्तें नहीं चुकाते हैं। जानकारी के अनुसार, अकेले जयपुर जिले में लगभग 3600 लोगों पर करीब 17 करोड़ रुपये की राशि बकाया है, जो विभाग के लिए एक बड़ी समस्या बन गई है।

अब पैराटीचर्स इन संबंधित लाभार्थियों के घरों पर जाकर उन्हें लोन चुकाने के लिए प्रेरित करेंगे। इसके लिए नोटिस तैयार करने और अन्य संबंधित कार्यों के लिए अलग-अलग टीमें गठित की जा रही हैं। हालांकि, विभाग की इस पहल का कुछ लोग विरोध भी कर रहे हैं।

राजस्थान उर्दू शिक्षक संघ के प्रदेशाध्यक्ष अमीन कायमखानी ने कहा कि शिक्षकों को लोन वसूली जैसे कार्य में लगाना उचित नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि आरएमएफडीसीसी और मदरसा बोर्ड का आपस में कोई सीधा संबंध नहीं है। यदि विभाग को पैराटीचर्स की मदद की आवश्यकता है, तो अल्पसंख्यक विभाग को सरकारी शिक्षकों की तरह इसके लिए अलग से मानदेय देना चाहिए।

वहीं, जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी अभिषेक सिद्ध ने बताया कि ऋणियों को राहत देते हुए एकमुश्त समाधान योजना लागू की गई है। इसके तहत, जो लोन 31 मार्च 2024 तक ओवरड्यू हो गए हैं, उन्हें 30 सितंबर 2025 तक सभी बकाया और अतिदेय मूलधन एकमुश्त जमा करवाने पर साधारण एवं दंडनीय ब्याज पर पूरी तरह से छूट दी जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि उच्च अधिकारियों के निर्देश पर इस कार्य में पैराटीचर्स से मदद ली जा रही है।

अब देखना यह होगा कि मदरसा पैराटीचर्स इस नई जिम्मेदारी को किस प्रकार निभाते हैं और क्या विभाग 17 करोड़ रुपये की इस बड़ी बकाया राशि को वसूल करने में सफल हो पाता है।

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