जयपुर। राजस्थान में तीन संभाग और नौ जिलों को खत्म करने के फैसले से सियासी हलचल तेज हो गई है। कांग्रेस ने इसे जनविरोधी बताते हुए भजनलाल सरकार के खिलाफ बड़ा आंदोलन करने की चेतावनी दी है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया का उल्लंघन करार देते हुए विधानसभा और सड़क दोनों पर विरोध प्रदर्शन करने का ऐलान किया है।
कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने शनिवार को पत्रकारों से बातचीत में कहा कि यह निर्णय जनता की भावनाओं के खिलाफ है। डोटासरा ने कहा, "पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के निधन पर सात दिन के राजकीय शोक के बावजूद इस प्रकार का निर्णय लेना खेदजनक है। सरकार ने उन नौ जिलों को खत्म कर दिया, जिन्हें कांग्रेस सरकार ने जनहित में बनाया था।"
डोटासरा ने स्पष्ट किया कि राजकीय शोक के कारण कांग्रेस 1 जनवरी तक कोई प्रदर्शन नहीं करेगी। इसके बाद पार्टी बड़ा आंदोलन करेगी। उन्होंने कहा कि यह निर्णय पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार द्वारा गठित सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारियों की अध्यक्षता वाली कमेटी की सिफारिशों के खिलाफ है। कांग्रेस नेता टीकाराम जूली ने कहा, "हम विधानसभा में इस मुद्दे पर सरकार की रेल बनाएंगे और जनता के अधिकारों के लिए लड़ाई लड़ेंगे।"
कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार ने बिना सर्वदलीय बैठक बुलाए यह अलोकतांत्रिक निर्णय लिया। डोटासरा ने कहा, "यह फैसला विवेकहीन है और जनता के हितों पर कुठाराघात करता है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को जनता के हित में निर्णय लेना चाहिए था, लेकिन उन्होंने पर्ची पर निर्भरता दिखाते हुए जनविरोधी कदम उठाया।"
टीकाराम जूली ने कहा कि छोटे जिले बनाने से प्रशासनिक कार्यक्षमता में सुधार होता है और न्याय त्वरित मिलता है। उन्होंने कहा, "मध्यप्रदेश में 53 जिले हैं, जबकि राजस्थान क्षेत्रफल में बड़ा होते हुए भी कम जिलों में बंटा है। हमारी सरकार बनने पर न केवल खत्म किए गए जिलों को फिर से बनाया जाएगा, बल्कि जरूरत पड़ने पर पांच-सात नए जिले भी बनाए जाएंगे।"
डोटासरा ने उप मुख्यमंत्री प्रेमचंद बैरवा पर निशाना साधते हुए कहा, "जिन जिलों के लिए बैरवा ने मांग उठाई थी, वही खत्म कर दिए गए। अब वे जनता को क्या मुंह दिखाएंगे? यह निर्णय स्पष्ट करता है कि सरकार ने जनता की मांगों को अनसुना कर दिया है।"
कांग्रेस ने इस मुद्दे पर बड़े जन आंदोलन की योजना बनाई है। पार्टी नेताओं का कहना है कि सड़क से लेकर सदन तक सरकार को इस जनविरोधी निर्णय को वापस लेने के लिए मजबूर किया जाएगा।
भजनलाल सरकार का यह निर्णय कांग्रेस और भाजपा के बीच एक बड़े राजनीतिक टकराव का कारण बनता दिख रहा है। कांग्रेस ने इसे जनता की भावनाओं के खिलाफ बताया है और इसे विधानसभा के साथ-साथ सड़कों पर भी उठाने की योजना बनाई है। यह देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले दिनों में इस सियासी मुद्दे का क्या परिणाम निकलता है।
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