राजस्थान में महात्मा गांधी इंग्लिश मीडियम सरकारी स्कूलों की समीक्षा के लिए गठित मंत्रीमंडलीय समिति को लेकर सियासत गरमा गई है। कांग्रेस ने इस कदम को स्कूलों को बंद करने की साजिश करार दिया है। वहीं, शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने कांग्रेस पर पलटवार करते हुए इसे राजनीति से प्रेरित और भ्रामक बयान बताया।
कांग्रेस पर शिक्षा के नाम पर छलावा करने का आरोप
शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने कांग्रेस पर आरोप लगाते हुए कहा कि उनकी सरकार ने अपने कार्यकाल में अंग्रेजी माध्यम स्कूलों के नाम पर केवल बोर्ड लगाने का काम किया। कांग्रेस सरकार ने ना तो इन स्कूलों के लिए अंग्रेजी शिक्षकों की भर्ती की और ना ही इसके लिए बजट का प्रावधान किया। दिलावर ने कहा कि यह कदम छात्रों और अभिभावकों के साथ छलावा था और सरकारी स्कूलों को बंद करने की साजिश का हिस्सा था।
स्कूलों को मजबूत बनाने का दावा
दिलावर ने कहा कि मंत्रीमंडलीय समिति का उद्देश्य इन स्कूलों को मजबूत बनाना है। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार शिक्षा के बुनियादी स्तर को सुधारने और प्रदेश के बच्चों को सर्वोत्तम शिक्षा देने के लिए प्रतिबद्ध है।
कांग्रेस पर भ्रष्टाचार और कुशासन का आरोप
शिक्षा मंत्री ने कांग्रेस पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए कहा कि उनकी सरकार ने शिक्षा के मंदिर को भ्रष्टाचार और पेपर चोरी से नाथी का बाड़ा बना दिया। उन्होंने कहा कि वसुंधरा राजे के कार्यकाल (2013-2018) के दौरान राजस्थान शिक्षा के क्षेत्र में देशभर में दूसरे स्थान पर था। इसके बाद कांग्रेस सरकार ने प्रदेश को गर्त में धकेल दिया।
गोविंद सिंह डोटासरा पर निशाना
मदन दिलावर ने पूर्व शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा पर निशाना साधते हुए कहा कि वे अपने बच्चों और चहेतों को फर्जी तरीके से नौकरियां दिलाने में व्यस्त रहे। उन्होंने सवाल उठाया कि कांग्रेस ने अपने कार्यकाल में अंग्रेजी माध्यम शिक्षकों की भर्ती क्यों नहीं की और स्कूलों के लिए संसाधन क्यों नहीं मुहैया कराए।
कांग्रेस की चेतावनी
दूसरी ओर, कांग्रेस ने भाजपा सरकार को चेतावनी दी है कि यदि स्कूलों के संबंध में कोई जनविरोधी निर्णय लिया गया तो प्रदेशभर में जन आंदोलन किया जाएगा। कांग्रेस का कहना है कि स्कूलों के लिए सुविधाएं देना सरकार की जिम्मेदारी है और इससे बचने के लिए गरीब बच्चों के अधिकार नहीं छीने जा सकते।
निष्कर्ष
महात्मा गांधी इंग्लिश मीडियम स्कूलों की समीक्षा को लेकर राज्य में शिक्षा और राजनीति का विषय गरमा गया है। सरकार और विपक्ष के बीच इस मुद्दे पर आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। अब देखना होगा कि मंत्रीमंडलीय समिति की समीक्षा के बाद सरकार क्या निर्णय लेती है और इसका छात्रों और अभिभावकों पर क्या प्रभाव पड़ता है।
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