जयपुर। राजस्थान में भजनलाल सरकार के नए फैसले ने प्रदेश में राजनीति का तापमान बढ़ा दिया है। शनिवार को हुई कैबिनेट बैठक में गहलोत सरकार के कार्यकाल में बनाए गए 17 में से 9 जिलों को निरस्त करने का निर्णय लिया गया। इनमें उपमुख्यमंत्री प्रेमचंद बैरवा का गृह जिला दूदू भी शामिल है। इस निर्णय के बाद दूदू क्षेत्र में भारी विरोध देखा गया।
दूदू में नारेबाजी और प्रदर्शन
दूदू जिले को निरस्त करने के बाद क्षेत्र के लोगों और कांग्रेस कार्यकर्ताओं में गुस्सा साफ नजर आया। स्थानीय कार्यकर्ताओं ने पुलिया के नीचे प्रदर्शन किया और उपमुख्यमंत्री प्रेमचंद बैरवा के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। कांग्रेस प्रवक्ता त्रिलोक सिंह चौधरी, आरिफ शेख, बी.सी. भाकर और विनोद दायमा के नेतृत्व में प्रदर्शनकारियों ने सरकार के फैसले पर नाराजगी जताई।
डिप्टी सीएम पर उठे सवाल
आरिफ शेख ने कहा कि उपमुख्यमंत्री प्रेमचंद बैरवा जिले के पक्ष में नहीं थे, और यही वजह है कि दूदू जिले को निरस्त कर दिया गया। कांग्रेस नेताओं ने भी बैरवा की भूमिका पर सवाल खड़े किए।
डोटासरा का तंज
पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा ने उपमुख्यमंत्री प्रेमचंद बैरवा पर निशाना साधते हुए कहा, "दिल्ली के चक्कर में मुश्किल से बचने वाले बैरवा को अब घर बैठा दिया गया। वे प्रेस कॉन्फ्रेंस करने तक नहीं आए। अब वे जनता को क्या मुंह दिखाएंगे?"
सरकार ने किन जिलों को रखा यथावत?
कैबिनेट के इस फैसले में आठ जिलों को यथावत रखा गया है:
कौन से जिले हुए निरस्त?
सरकार ने इन नौ जिलों को निरस्त कर दिया है:
निरस्त किए गए तीन संभाग
सरकार ने तीन संभागों को भी समाप्त करने का निर्णय लिया है:
विरोध के सुर तेज
सरकार के इस फैसले से प्रदेशभर में विरोध के सुर उठने लगे हैं। विशेष रूप से उन जिलों में, जिन्हें रद्द कर दिया गया है। दूदू में उपमुख्यमंत्री प्रेमचंद बैरवा के खिलाफ जारी प्रदर्शन इस बात का संकेत है कि यह मुद्दा आने वाले दिनों में और गर्मा सकता है।
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