राजस्थान में पड़ रही भीषण गर्मी और झुलसा देने वाली हीटवेव (लू) के बीच राज्य सरकार का एक अजीब और संवेदनहीन विरोधाभास सामने आया है। बढ़ते तापमान को देखते हुए सरकार ने 17 मई से प्रदेश के सभी सरकारी और निजी स्कूलों में 'ग्रीष्मकालीन अवकाश' (गर्मी की छुट्टियां) घोषित कर दी हैं। लेकिन, उसी स्कूल परिसर या मोहल्लों में संचालित होने वाले आंगनबाड़ी केंद्रों के 3 से 6 साल के बेहद छोटे नौनिहालों को इस भीषण तपन में भी केंद्रों पर बुलाया जा रहा है। सरकार के इस दोहरे रवैये और भेदभाव के कारण डीग जिले सहित प्रदेशभर के मासूम बच्चे परेशान होने को मजबूर हैं।
डीग जिले में कुल 871 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं, जिनमें करीब 47 हजार मासूम बच्चे पंजीकृत हैं। जब मीडिया टीम ने मंगलवार को शहर के विभिन्न आंगनबाड़ी केंद्रों का रियलिटी चेक किया, तो स्थितियां बेहद डरावनी और गंभीर मिलीं:
बिना बिजली-पंखे के चल रहे केंद्र: जिले के कई आंगनबाड़ी केंद्रों में न तो बिजली का कनेक्शन है और न ही पंखे लगे हैं। कई केंद्र किराए के छोटे और तंग कमरों में चल रहे हैं, जहाँ हवा का नामोनिशान नहीं है और भारी घुटन होती है।
तपती दोपहर में घर लौटने की मजबूरी: इन मासूमों को सुबह 8 बजे केंद्र बुलाया जाता है और दोपहर 12 बजे छुट्टी की जाती है। 12 बजे तक सूरज आग उगलने लगता है और ये 3 से 6 साल के बच्चे पसीने से तरबतर होकर, रोते हुए तपती सड़कों से अपने घर पहुंचते हैं। घुटन भरे कमरों में बैठे बच्चे अब मासूमियत से पूछ रहे हैं कि— "कलक्टर जी... हमारी छुट्टी कब होगी?"
आंगनबाड़ी महिला कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं ने भी सरकार के इस भेदभावपूर्ण आदेश पर कड़ा रोष जताया है। उनका कहना है:
"जब भीषण गर्मी के कारण सरकारी स्कूलों के बड़े बच्चों के लिए छुट्टियां की जा चुकी हैं, तो उसी कैंपस या पड़ोस में रहने वाले 3 से 6 वर्ष के छोटे बच्चों को इस जानलेवा धूप में क्यों बुलाया जा रहा है? क्या इन नौनिहालों को गर्मी नहीं लगती? मई और जून के इस भीषण दौर में आंगनबाड़ी केंद्रों को भी पूरी तरह बंद किया जाना चाहिए।"
जिला चिकित्सालय डीग के शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. हेमराज गुर्जर ने इस मौसम में छोटे बच्चों को बाहर भेजने को बेहद खतरनाक बताया है। उन्होंने बच्चों को धूप से बचाने के लिए निम्नलिखित महत्वपूर्ण सलाह दी हैं:
हीटस्ट्रोक और डिहाइड्रेशन: छोटे बच्चों के शरीर का तापमान बड़ों की तुलना में बहुत जल्दी बढ़ता है। तेज धूप के कारण उन्हें डिहाइड्रेशन (पानी की कमी), लू लगना (हीटस्ट्रोक), उल्टी-दस्त और अत्यधिक कमजोरी हो सकती है।
धूप से बचाएं: सुबह 11 बजे से शाम 4 बजे तक बच्चों को किसी भी हाल में तेज धूप में बाहर न निकालें।
खान-पान का रखें ध्यान: बच्चों को बार-बार पानी, नींबू पानी, छाछ, नारियल पानी या घर का बना शरबत दें। यदि बच्चा सुस्त दिखे या पेशाब कम आए, तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं। उन्हें हल्के रंग के सूती और ढीले कपड़े ही पहनाएं।
एक तरफ सरकार और जिला प्रशासन बाल स्वास्थ्य को लेकर बड़े-बड़े दावे करते हैं, वहीं दूसरी तरफ इस जानलेवा मौसम में सबसे कमजोर और छोटे बच्चों को राहत न देना प्रशासनिक संवेदनहीनता को दर्शाता है। अब देखना यह है कि इस जमीनी हकीकत के सामने आने के बाद डीग जिला कलेक्टर और राज्य सरकार इन नौनिहालों को राहत देने के लिए कब आदेश जारी करते हैं।
#RajasthanSummerVacation #AnganwadiWorkers #DeegNews #HeatwaveAlert #RajasthanGovernment #ChildSafety #PanicSummer #RajasthanPolice #HumanityFirst
No comments yet. Be the first to comment!
Please Login to comment.
© G News Portal. All Rights Reserved.