रेंग रही रामगंजमंडी-भोपाल रेल परियोजना, 26 साल में 276 में से 187 किमी हुआ काम

रेंग रही रामगंजमंडी-भोपाल रेल परियोजना, 26 साल में 276 में से 187 किमी हुआ काम

 

रामगंजमंडी-भोपाल रेल परियोजना: 26 साल में भी अधूरी, अब 2027 तक काम पूरा करने का नया 'डेडलाइन'

कोटा | राजस्थान और मध्य प्रदेश को जोड़ने वाली बेहद महत्वपूर्ण रामगंजमंडी-भोपाल नई रेल लाइन परियोजना कछुआ चाल की शिकार है। वर्ष 2001 में स्वीकृत हुई इस 276.5 किलोमीटर लंबी परियोजना में पिछले 26 सालों में मात्र 187 किलोमीटर का ही काम पूरा हो पाया है। वर्तमान रफ्तार को देखते हुए इसके पूरा होने में अभी लंबा वक्त लग सकता है, हालांकि रेलवे इसे अगले दो वर्षों में पूरा करने का लक्ष्य लेकर चल रहा है।

प्रोजेक्ट की वर्तमान स्थिति: एक नज़र में

  • कुल लंबाई: 276.5 किमी

  • कोटा मंडल का हिस्सा: 165 किमी (145 किमी काम पूरा)

  • भोपाल मंडल का हिस्सा: 111 किमी

  • अब तक कुल काम: 187 किमी पूरा, 89 किमी शेष।

  • अनुमानित लागत: ₹3,035 करोड़।

क्यों हुई 26 साल की देरी?

परियोजना के 2004 में धरातल पर आने के बाद से ही कई बाधाएं सामने आईं:

  1. बजट का अभाव: लंबे समय तक परियोजना को पर्याप्त फंड नहीं मिला।

  2. भूमि अवाप्ति: जमीन अधिग्रहण की जटिल प्रक्रियाओं ने काम की गति रोकी।

  3. टेंडर प्रक्रिया: ठेकों के समय पर पूरे न होने से काम बार-बार अटकता रहा।

परियोजना के लाभ: दूरी और समय की होगी भारी बचत

यह परियोजना कोटा, झालावाड़, राजगढ़, सीहोर और भोपाल सहित 5 जिलों के लिए लाइफलाइन साबित होगी:

  • दूरी में कमी: कोटा और भोपाल के बीच की दूरी लगभग 100 किमी कम हो जाएगी।

  • समय की बचत: यात्रा समय में 2 से 3 घंटे की कटौती होगी।

  • कोयला परिवहन: झालावाड़ के कालीसिंध थर्मल पावर प्लांट के लिए कोयला मार्ग 42 किमी छोटा हो जाएगा, जिससे माल ढुलाई सस्ती होगी।

  • दक्षिण भारत से जुड़ाव: जयपुर से दक्षिण भारत जाने वाली ट्रेनों का मार्ग 115 किमी कम होगा।

आधुनिक बुनियादी ढांचा

परियोजना के तहत 27 स्टेशनों का निर्माण किया जा रहा है, जिनमें रामगंजमंडी, झालावाड़, अकलेरा, ब्यावरा और नरसिंहगढ़ जैसे प्रमुख शहर शामिल हैं। पूरे रूट पर:

  • 4 सुरंगें और 4 महत्वपूर्ण पुल बनाए जा रहे हैं।

  • 34 मुख्य पुल और 171 अंडरपास का प्रावधान है।

रेलवे का पक्ष

वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक सौरभ जैन के अनुसार, कोटा मंडल के अधीन रामगंजमंडी से राजगढ़ (145 किमी) तक काम पूरा हो चुका है। शेष 89 किमी (कुरावर, श्यामपुर, सोनकच्छ आदि खंड) का कार्य वित्तीय वर्ष 2026-27 तक पूरा करने का लक्ष्य है। रेलवे का दावा है कि अब संसाधनों और फंड की कमी नहीं है, जिससे परियोजना को तेजी से अंजाम दिया जा रहा है।


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