सवाई माधोपुर | विश्व प्रसिद्ध रणथंभौर नेशनल पार्क इन दिनों बाघों की अठखेलियों और शानदार साइटिंग से गुलजार है। रविवार सुबह की सफारी के दौरान जोन नंबर चार के बैरदा वन क्षेत्र में पर्यटकों को एक दुर्लभ और रोमांचक नजारा देखने को मिला। यहाँ पहली बार मां बनी बाघिन टी-2307 (दुर्गा) अपने तीन नन्हे शावकों को शिकार के गुर सिखाती नजर आई।
पर्यटकों ने देखा कि बाघिन दुर्गा अपने तीनों शावकों के साथ एक नीलगाय के शिकार का लुत्फ उठा रही थी। बाघिन को अपने शावकों को वाइल्ड लाइफ की ट्रेनिंग देते और शिकार का आनंद लेते देख पर्यटक रोमांचित हो उठे। कई पर्यटकों ने इस अद्भुत दृश्य को अपने कैमरों और मोबाइल में कैद किया।
वनाधिकारियों के अनुसार:
उम्र और वंश: बाघिन दुर्गा की उम्र करीब 4 साल है। वह बाघ T-121 और बाघिन T-111 (शक्ति) की संतान है।
शावक: दुर्गा ने पहली बार कुंडेरा रेंज के बैरदा क्षेत्र में तीन शावकों को जन्म दिया है। फिलहाल वह पूरी तरह से अपने शावकों की परवरिश और उन्हें जंगल में जीवित रहने का प्रशिक्षण देने में जुटी है।
सिर्फ जोन चार ही नहीं, बल्कि शनिवार शाम को जोन नंबर तीन में भी पर्यटकों की चांदी रही। यहाँ पदम तालाब के पास मशहूर बाघिन रिद्धि स्वच्छंद विचरण करती हुई दिखाई दी। तालाब के किनारे रिद्धि की अठखेलियों ने विदेशी और देसी सैलानियों का मन मोह लिया।
अप्रैल की गर्मी के बावजूद रणथंभौर में पर्यटकों की बंपर आवक हो रही है। पार्क में बाघ-बाघिनों की लगातार साइटिंग ने यहाँ के पर्यटन सीजन को और भी खुशनुमा बना दिया है। सैलानियों का कहना है कि बाघों को उनके प्राकृतिक आवास में शिकार करते देखना एक जीवनभर का अनुभव है।
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