भरतपुर: भरतपुर जिले के उच्चैन क्षेत्र में एक दुष्कर्म पीड़िता ने आत्महत्या कर ली है। इस घटना ने एक बार फिर से राज्य सरकार और प्रशासन की महिला सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पीड़िता ने आत्महत्या करने से पहले पुलिस और महिला आयोग से कई बार गुहार लगाई थी, लेकिन उसे कोई मदद नहीं मिली।
क्या है पूरा मामला?
पीड़िता ने कुछ समय पहले दुष्कर्म की शिकायत दर्ज कराई थी। हालांकि, पुलिस ने इस मामले में कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। पीड़िता को लगातार धमकियां मिल रही थीं और वह मानसिक रूप से काफी परेशान थी। आखिरकार उसने आत्महत्या कर ली।
चिकित्सा विभाग की भी लापरवाही
आत्महत्या करने से पहले पीड़िता को गंभीर हालत में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र उच्चैन में भर्ती कराया गया था। लेकिन, अस्पताल प्रशासन ने उसे बिना किसी प्राथमिक उपचार के ही भरतपुर के आरबीएम अस्पताल रेफर कर दिया। एम्बुलेंस में भी पीड़िता को कोई चिकित्सा सुविधा उपलब्ध नहीं कराई गई।
आरबीएम अस्पताल की डॉक्टर का बयान
आरबीएम अस्पताल की इमरजेंसी में तैनात डॉक्टर सुरेखा ने बताया कि पीड़िता का रेफर कार्ड में कोई भी ट्रीटमेंट नहीं दर्शाया गया था। महिला को कोई कैनुला या ड्रिप भी नहीं लगाई गई थी। डॉक्टर का मानना है कि उच्चैन अस्पताल में महिला को ट्रीटमेंट देना चाहिए था और एम्बुलेंस में भी उसे इलाज दिया जाना चाहिए था।
सरकार और प्रशासन पर सवाल
यह घटना राजस्थान सरकार और प्रशासन की महिला सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती है। पीड़िता को न्याय नहीं मिला और उसे अपनी जान गवानी पड़ी। इस घटना से यह साफ हो जाता है कि राज्य में महिलाओं के साथ हो रहे अपराधों पर रोक लगाने के लिए सरकार और प्रशासन को और अधिक गंभीरता से काम करना होगा।
क्या किया जाना चाहिए?
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