कोटा। भारतीय रेलवे ने पिछले एक दशक में अपनी बुनियादी संरचना (Infrastructure) और सुरक्षा मानकों में क्रांतिकारी बदलाव किए हैं। रेल मंत्रालय द्वारा जारी हालिया आंकड़ों के अनुसार, पिछले 12 वर्षों में किए गए सघन ट्रैक नवीनीकरण और आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल से रेल दुर्घटनाओं में 89 प्रतिशत तक की ऐतिहासिक कमी दर्ज की गई है।
रेलवे अधिकारियों द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, पटरियों को मजबूत बनाने के लिए युद्ध स्तर पर काम किया गया है:
ट्रैक नवीनीकरण: पिछले 12 वर्षों में कुल 55,000 किलोमीटर रेल पटरियों का नवीनीकरण किया गया।
लंबे रेल पैनल: लगभग 44,000 ट्रैक किमी क्षेत्र में 260 मीटर लंबे रेल पैनल बिछाए गए हैं, जिससे जोड़ों की संख्या कम हुई है।
मजबूत पटरियां: 80,000 ट्रैक किमी से अधिक हिस्से में अब भारी और मजबूत 60 किलोग्राम वाली रेल पटरियों का उपयोग किया जा रहा है।
जांच और रखरखाव: इस अवधि में 36.2 लाख ट्रैक किमी और 2.25 करोड़ वेल्ड की अल्ट्रासोनिक जांच की गई, जिससे पटरी टूटने की घटनाएं 90% कम हो गई हैं।
रेलवे ने न केवल सुरक्षा बढ़ाई है, बल्कि ट्रेनों की गति क्षमता में भी जबरदस्त सुधार किया है:
स्पीड क्षमता: 130 किमी/घंटा की रफ्तार वाली पटरियों का हिस्सा 6% से बढ़कर 23% हो गया है। वहीं, 110 किमी/घंटा वाली पटरियां अब नेटवर्क का 80% हिस्सा हैं।
मशीनों की ताकत: ट्रैक रखरखाव के लिए मशीनों की संख्या साल 2014 के 748 से बढ़कर 2026 में 1,785 तक पहुँच गई है।
सुरक्षा कवच: जानवरों और अतिक्रमण से बचाव के लिए 17,500 किमी तक बाड़ (Fencing) लगाई गई है। साथ ही 36,000 नए मजबूत स्विच और 7,500 विशेष क्रॉसिंग लगाए गए हैं।
रेलवे के 'सेफ्टी रिकॉर्ड' में आया सुधार भारतीय रेल के इतिहास में सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धियों में से एक है:
| विवरण | वर्ष 2014-15 | वर्ष 2025-26 | सुधार (%) |
| बड़े रेल हादसे | 135 | 16 | 89% की कमी |
| हादसों की दर (प्रति 10 लाख किमी) | 0.11 | 0.01 | 90% सुधार |
अधिकारियों का मत: "तकनीकी सुधार, निरंतर पेट्रोलिंग और आधुनिक ट्रैक मशीनों के उपयोग ने मानवीय भूलों और तकनीकी खराबी से होने वाले हादसों को न्यूनतम स्तर पर ला दिया है। आज हमारा 80% नेटवर्क 110 किमी/घंटा से अधिक की रफ्तार संभालने में सक्षम है।"
यह रिपोर्ट दर्शाती है कि भारतीय रेलवे अब 'स्पीड' और 'सेफ्टी' दोनों मोर्चों पर वैश्विक मानकों की ओर तेजी से अग्रसर है।
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