कोटा/नई दिल्ली: रेलवे बोर्ड ने एक बड़ा फैसला लेते हुए रिटायरमेंट पर रेलकर्मियों को दिए जाने वाले स्वर्ण मढ़ित चांदी के पदकों (Gold Plated Silver Medals) को तत्काल प्रभाव से बंद करने का आदेश जारी किया है। बुधवार को जारी इस आदेश के बाद अब विदाई समारोहों में कर्मचारियों को यह स्मृति चिह्न नहीं दिया जाएगा।
बोर्ड ने हालांकि आदेश में किसी विशिष्ट कारण का जिक्र नहीं किया है, लेकिन माना जा रहा है कि हाल ही में सामने आए 'मेडल घोटाले' ने इस फैसले में बड़ी भूमिका निभाई है।
शिकायत: भोपाल मंडल में यह मामला सबसे पहले तब गरमाया जब जांच में पाया गया कि 20 ग्राम के जिस सिक्के को चांदी का बताकर दिया जा रहा था, उसमें चांदी केवल 0.23 ग्राम थी।
मिलावट: बाकी हिस्सा तांबा और अन्य सस्ती धातुओं का निकला।
जाँच: जबलपुर मुख्यालय ने इंदौर की एक फर्म से 3,640 सिक्के खरीदे थे। वर्तमान में रेलवे विजिलेंस और पुलिस इस पूरे फर्जीवाड़े की जांच कर रही है।
घोटाले के अलावा आर्थिक बोझ भी एक बड़ी वजह है। वर्तमान में चांदी की कीमतें ₹3.80 लाख प्रति किलो के आसपास पहुंच चुकी हैं।
बजट का गणित: 2 साल पहले जो सिक्का रेलवे को ₹2,000 में पड़ता था, आज उसकी कीमत करीब ₹8,000 तक पहुंच गई है।
कोटा मंडल का उदाहरण: अकेले कोटा मंडल में इस साल 292 कर्मचारी रिटायर होने वाले हैं। यदि पुरानी व्यवस्था लागू रहती, तो रेलवे को केवल कोटा में ही करीब ₹23.36 लाख खर्च करने पड़ते। साल के अंत तक चांदी की कीमतों में संभावित बढ़ोत्तरी इस बजट को और बिगाड़ सकती थी।
रेलवे बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि जिन मंडलों के पास वर्तमान में इन पदकों का स्टॉक मौजूद है, उन्हें अब कर्मचारियों को न दिया जाए। इसके बजाय उन पदकों का उपयोग अन्य विभागीय कार्यों या गलाकर धातु के रूप में किया जाए।
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